रिप्रोडक्टिव ऐज में ओबेसिटी: क्या हार्मोनल बदलाव हैं इसकी बड़ी वजह?

इंसुलिन एक इम्पोर्टेन्ट हार्मोन है जो ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करता है। जब बॉडी में इंसुलिन लेस्स सेंसिटिव हो जाता है, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है।

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Dimpy Bhatt
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hormonal changes and obesity in reproductive age women

Photograph: (file)

रिप्रोडक्टिव ऐज में वेट गेन सिर्फ डाइट या कम फिजिकल एक्टिविटी का रिजल्ट नहीं होता, बल्कि हार्मोनल चेंज भी इसकी बड़ी वजह हो सकते हैं। एस्ट्रोजन (estrogen), प्रोजेस्टेरोन (progesterone) और इंसुलिन जैसे हार्मोन बॉडी के फैट स्टोरेज और मेटाबॉलिज्म (metabolism) को प्रभावित करते हैं। सही जानकारी और बैलेंस्ड लाइफस्टाइल से इस प्रॉब्लम को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।

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रिप्रोडक्टिव ऐज में ओबेसिटी: क्या हार्मोनल बदलाव हैं इसकी बड़ी वजह?

हार्मोनल इम्बैलेंस और वेट गेन 

रिप्रोडक्टिव ऐज में महिलाओं के बॉडी में एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन का लेवल रेगुलरली  बदलता रहता है। जब इन हार्मोनों का बैलेंस बिगड़ता है, तो बॉडी में फैट जमा होने की टेन्डेन्सी बढ़ सकती है। खासकर पेट और कमर के आसपास फैट जमा होना हार्मोनल चेंज से जुड़ा हो सकता है। कुछ महिलाओं में यह बदलाव धीरे-धीरे वेट गेन का कारण बनता है।

इंसुलिन रेजिस्टेंस का रोल

इंसुलिन एक इम्पोर्टेन्ट हार्मोन है जो ब्लड शुगर को कण्ट्रोल करता है। जब बॉडी में इंसुलिन लेस्स सेंसिटिव हो जाता है, तो इसे इंसुलिन रेजिस्टेंस कहा जाता है। ये सिचुएशन वेट गेन के साथ-साथ टाइप 2 डायबिटीज का रिस्क भी बढ़ा सकता है। रिप्रोडक्टिव ऐज में हार्मोनल चेंज इंसुलिन के काम करने के तरीके को प्रभावित कर सकते हैं, जिससे वेट कण्ट्रोल करना हार्ड हो जाता है।

पीसीओएस और ओबेसिटी का रिलेशन 

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) रिप्रोडक्टिव ऐज की महिलाओं में आम प्रॉब्लम है। इस सिचुएशन में एंड्रोजन (male hormone) का लेवल बढ़ सकता है, जिससे वेट गेन, इर्रेगुलर पीरियड्स और स्किन प्रॉब्लम हो सकती हैं। PCOS और ओबेसिटी एक-दूसरे को प्रभावित करते हैं — वेट गेन से हार्मोनल इम्बैलेंस बढ़ सकता है और हार्मोनल प्रॉब्लम से वेट कम करना मुश्किल हो सकता है।

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लाइफस्टाइल फैक्टर्स भी हैं जिम्मेदार

हालांकि हार्मोनल चेंज इम्पोर्टेन्ट रोल निभाते हैं, लेकिन इर्रेगुलर रूटीन्स, जंक फूड, कम फिजिकल एक्टिविटी और स्ट्रेस भी वेट गेन का बड़े रीज़न हैं। लंबे टाइम तक बैठे रहना और एनफ नींद न लेना मेटाबॉलिज्म को स्लो कर सकता है। इसलिए केवल हार्मोन को ब्लामे देना सही नहीं है; लाइफस्टाइल में सुधार भी जरूरी है।

कैसे करें सही मैनेजमेंट?

ओबेसिटी को कंट्रोल करने के लिए बैलेंस्ड डाइट, रेगुलर एक्सरसाइज और एनफ नींद बेहद जरूरी है। हाई-प्रोटीन डाइट, फाइबर रिच फ़ूड और लौ शुगर का कोन्सुम्प्शन फायदेमंद हो सकता है। अगर वेट तेजी से गेन रहो हा है या पीरियड्स इर्रेगुलर हैं, तो डॉक्टर से कंसल्ट करवाना बेहतर है। रिप्रोडक्टिव ऐज में ओबेसिटी एक काम्प्लेक्स प्रॉब्लम है, जिसमें हार्मोनल और लाइफस्टाइल दोनों फैक्टर शामिल हैं। अवेयरनेस और टाइम पर स्टेप उठाकर हेअल्थी वेट बनाए रखना संभव है।

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