फेलियर जर्नलिंग: कैसे पुरानी गलतियों को लिखना स्ट्रेस कम कर सकता है

इमोशन को लिखना कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन के लेवल को कम कर सकता है। जब आप किसी फेलियर के बारे में खुलकर लिखते हैं, तो आप उसे एक्सेप्ट करते हैं।

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Dimpy Bhatt
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how failure journaling can reduce stress and improve performance

Photograph: (File Image)

हम में से ज्यादातर लोग अपने फेलियर को भूलने की कोशिश करते हैं, लेकिन क्या हो अगर उन्हें लिखना ही स्ट्रेस कम करने का तरीका बन जाए? फेलियर जर्नलिंग यानी अपनी मिस्टेक्स और फेलियर को लिखना, मेन्टल स्ट्रेस को कम करने और बेटर परफॉरमेंस करने में मदद कर सकता है। ये तरीका सेल्फ रिफ्लेक्शन और सेल्फ डेवलपमेंट की ओर एक स्ट्रांग स्टेप है।

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फेलियर जर्नलिंग: कैसे पुरानी गलतियों को लिखना स्ट्रेस कम कर सकता है

लाइट मंद करता है

जब हम अपनी गलतियों को मन में दबाकर रखते हैं, तो वो बार-बार मंद में आती रहती हैं और स्ट्रेस बढ़ाती हैं। लेकिन जब आप उन्हें पेपर पर लिख देते हैं, तो मंद को एक तरह की रिलीफ मिलती है। ये प्रोसेस आपके थॉट्स को ओर्गनइजे करती है और उनकंससियस फियर को कम करती है। लिखने से इमोशंस क्लैरिफी होती हैं और मंद लाइट फील होता है।

स्ट्रेस हार्मोन को कम करने में मदद

इमोशन को लिखना कोर्टिसोल जैसे स्ट्रेस हार्मोन के लेवल को कम कर सकता है। जब आप किसी फेलियर के बारे में खुलकर लिखते हैं, तो आप उसे एक्सेप्ट करते हैं। यह एक्सेप्टेंस मेन्टल पीस लाती है और बॉडी की स्ट्रेस रिएक्शन को धीमा करती है। यानी लिखना सिर्फ मेंटली ही नहीं, फिजिकली भी फायदेमंद हो सकता है।

गलतियों से सीखने का मौका

फेलियर जर्नलिंग सिर्फ दुख एक्सप्रेस का जरिया नहीं है, बल्कि सीखने का टूल है। जब आप लिखते हैं कि क्या हुआ, क्यों हुआ और आगे क्या बेहतर किया जा सकता है, तो आप अपनी गलतियों को एक्सपीरियंस में बदल देते हैं। ये तरीका फ्यूचर में बेहतर डिसिशन लेने में मदद करता है और सेल्फ कॉन्फिडेंस बढ़ाता है।

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सेल्फ एक्सेप्टेन्स और ग्रोथ माइंडसेट

अपने फेलियर को लिखना सेल्फ एक्सेप्टेन्स की ओर ले जाता है। आप समझते हैं कि गलती करना ह्यूमन नेचर है। इससे परफेक्शन की अननेसेसरी डिजायर कम होती है और ग्रोथ माइंडसेट डेवेलोप होता है। आप खुद को जज करने के बजाय सुधारने पर ध्यान देते हैं।

कैसे शुरू करें फेलियर जर्नलिंग?

हर दिन या हफ्ते में कुछ टाइम निकालकर अपनी किसी एक गलती या फेलियर एक्सपेरिकेन्स को लिखें। उसके साथ ये भी लिखें कि आपने उससे क्या सीखा और अगली बार क्या अलग करेंगे। आनेस्टी और कंसिस्टेंसी इस प्रोसेस की के है। इसे प्राइवेट रखें, ताकि आप खुलकर अपनी इमोशन एक्सप्रेस कर सकें।

स्ट्रेस फेलियर