कोरोनावायरस के इस समय में जहाँ हम सभी मुश्किलों का सामना कर रहे हैं वहीँ ऐसे बहुत से लोग हैं जो बेसिक चीज़ों के लिए भी तरस रहे हैं।  ऐसे मुश्किल हालातों में बहुत से लोग कोरोना वारियर्स के रूप में सामने आये हैं और अपनी और से हर तरीके से मदद कर रहे हैं।  आज हम बात करेंगे ऐसी ही कोरोनावारियर प्रियल भरद्वाज के बारे में जो अपने कैंपेन #MenstrualEquity के अंदर गरीब महिलाओं को फ्री पैड्स अवेलेबल करवा रही हैं।  शी दपीपल.टी.वी हिंदी ने एक एक्सक्लूसिव इंटरव्यू में उनसे बात की और उनके कैंपेन के बारे में जाना।

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1.आपको इस  कैंपेन को शुरू करने के लिए किस बात ने प्रेरित किया ?

मै पेशे से एक फ़ैशन डिज़ाइनर हूँ और साथ ही साथ महिलाओं और बच्चों के डेवलपमेंट में हमेशा से ही इंटरेस्टेड रही हूँ। छोटी बच्चियों का पढ़ना व स्कूल जाना, महिलाओं का कार्य क्षेत्र में आगे बढ़ना जैसे विषय पर मैंने कई सालो में काफी कार्य किया है। लेकिन जब हम सभी की ज़िंदगी में Covid-19 ने दस्तक दी तो मानो हम तयार नहीं थे।  इस संकट में सब पर असर पड़ा लेकिन सबसे ज़्यादा मुश्किल गरीब व डेली वेज वर्कर्स पर आयी। मैं फीड माय नॉएडा के द्वारा कयी लाखों लोगों तक पहुँच पायी।

उनको दिन का एक समय का तसल्ली से खाना खिलाते समय मेरे मन में हमेशा एक सवाल आता रहा कि महिलाओं के लिए एक और चीज़ बहुत ज़रूरी है। मैं एक महिला होने के नाते बखूबी समझ सकती हूँ की मेंस्ट्रुएशन (menstruation) के विषय पर चर्चा व कार्य करना कितना ज़रूरी है। इसी तरह सोच विचार कर और इस बारे में जाँच कर संगिनी  सहेली के नाम से इस कैम्पेन की शुरुआत की।

क़यी महिलाओं ने विडीओ, फ़ोटो के माध्यम से चर्चा शुरू की, किसी ने वॉलंटीरिंग व फ़ंडिंग के ज़रिए अपने अपने इलाक़े में  डिस्ट्रीब्यूशन सेट अप किए और उनसे प्रेरणा लेकर औरतों ने हमें मैसेज करना शुरू किया जिससे हम 11 स्टेट्स तक पहुँच पाए है। – प्रियल भरद्वाज

2.अब तक आप अपने कैंपेन #MenstrualEquity के तहत कितनी महिलाओं को पैड्स दे चुकी हैं और आपके कैंपेन का क्या इम्पैक्टहुआ है ?

इस कैम्पेन की शुरूवात 15 मई से हुई थी और आज तक हम कुल 1,22,000 महिलाओं तक पैड्स पहुँचा पाए है। 11 स्टेट्स में बहुत सी महिलाओं को सेनेटरी पैड्स के बारे में समझाया व जागरूक करते हुए चर्चा की जिससे महिलाओं को एक ज़रिया मिला जहां वो इस बारे में बात कर पाई और समझ पाई के यह कितना ज़रूरी है । पैड्स की क़ीमत समझाते हुए उन्हें जागरूक किया की महिलाएं कुल 20-25 एक महीने खर्च कर वह अनगिनत बीमारीयो से बच सकती है।

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3.आपको लोगों से अपने कैंपेन के लिए क्या रेस्पॉन्स मिला है ? क्या आपके इस कैंपेन से और भी लोग इंस्पायर हुए हैं ?

बहुत अच्छा रेस्पॉन्स मिला शुरुआत मे मैंने नज़दीकी स्टेशन पर जाना शुरू किया जहाँ से माइग्रेंट वर्कर्स अपने घर की ओर जा रहे थे और वहाँ से मैं पैड्स देना स्टार्ट करती गयी। इसे देख कर काफ़ी महिलाओं का हर स्टेट से मैसेज आया और वह जुड़ती गुई और अलग अलग रूप से अपना कॉंट्रिब्यूशन देती गयी। क़यी महिलाओं ने विडीओ, फ़ोटो के माध्यम से चर्चा शुरू की, किसी ने वॉलंटीरिंग व फ़ंडिंग के ज़रिए अपने अपने इलाक़े में  डिस्ट्रीब्यूशन सेट अप किए और उनसे प्रेरणा लेकर औरतों ने हमें मैसेज करना शुरू किया जिससे हम 11 स्टेट्स तक पहुँच पाए है।  हर स्टेट में महिलाएँ इसे बखूबी लीड कर बहुत सी जग़हो तक पैड्स पहुँचा रही है जिसकी हमने शुरुआत में कल्पना भी नहीं की था। जैसे की संगरूर डिस्ट्रिक्ट जेल, जम्मू के डोडा व गंदोह इलाक़े और बंगाल के अम्फान साइक्लोन से अफेक्टेड जगहों तक हम पहुँच पाए है।

4.इस कैंपेन को इतना आगे बढ़ाने पर और इसके इस तरह से सफल होने पर आपको कैसा महसूस होता है ?

जो कहावतें बचपन में सुनी थी उनको सच होता देख हौसला बढ़ रहा है कि जब कोई अच्छा कार्य करना चाहता है उसे बस एक कदम बढ़ाने की देर है। सभी को साथ मिलकर काम करना चाहिए जैसा की प्रधान मंत्री श्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा है- हम आत्मनिर्भर बनकर आगे बढ़ सकते है।

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