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Research Ethics: शोध कार्य के दौरान न भूलें शोध की नैतिकता को

क्या आप रिसर्च या शोध करने के इच्छुक हैं या आप शोध कार्य में संलग्न हैं, तो जानें शोध मूल्यों को। शोध मूल्यों या शोध की नैतिकता को रिसर्च एथिक्स भी कहते हैं। आइए इस ब्लॉग से जानें शोध कार्य से जुड़े मूल्यों को

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Prabha Joshi
17 Jan 2023
Research Ethics: शोध कार्य के दौरान न भूलें शोध की नैतिकता को

शोध में नैतिकता या मूल्य बहुत मायने रखते हैं

Research Ethics: क्या आप शोध करने के इच्छुक हैं या आप शोध कार्य में संलग्न हैं, तो आइए जानें शोध के मूल्यों या उससे जुड़ी नैतिकता को। शोध करने से पूर्व हमें शोध के मूल्यों के प्रति जानकारी होनी चाहिए। शोध मूल्यों या शोध की नैतिकता को अंग्रेज़ी में रिसर्च एथिक्स कहते हैं। शोध का काम गहरे अध्ययन से जुड़ा होता है। कुछ भी नया लाने या पुराने में बदलाव करने के लिए शोध की आवश्यकता होती है। शोध के जरिए हम किसी चीज़ के बारे में जानकारी हासिल करते हैं और फिर वह जानकारी समाज में साझा करते हैं। पर इन सब के दौरान हमें सैंपल वर्क से गुज़रना होता है। हमें आंकड़ों की ज़रूरत पड़ती है। ऐसे में हमें शोध मूल्यों का ध्यान रखना होता है।

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रिसर्च एथिक्स या शोध में नैतिकता क्या है

बता दें, शोध कार्य में भी मूल्यों की आवश्यकता पड़ती है। शोध मूल्य या शोध में नैतिकता या रिसर्च एथिक्स, समाज में वैज्ञानिक अखंडता को स्थापित करने, मानव अधिकारों और गरिमा को बनाए रखने और विज्ञान और समाज के बीच सहयोग स्थापित करने के लिए बनाए गए हैं। इसीलिए ज़रूरी है हम अपनी रिसर्च के दौरान इन रिसर्च एथिक्स को फॉलो करें और रिसर्च कंडक्ट सही रखें।

क्या है रिसर्च एथिक्स से जुड़े पहलू

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हमें शोध कार्य या रिसर्च के दौरान कई बातों का ध्यान रखना होता है। आइए विस्तार से जानें रिसर्च एथिक्स या शोध के मूल्यों या नैतिकताओं को :-

  • स्वैच्छिक है भागीदारी : ध्यान रहे आंकड़े इकट्ठा करने के दौरान कोई भी अपनी इच्छा से आंकड़े देता है। शोध कार्य के दौरान कोई भी बाध्य नहीं होता कि वह आपको जवाब दे ही। कोई भी आपके शोध कार्य में हिस्सा ले सकता है और बिना किसी कारण बाहर आ सकता है या बीच में ही छोड़ सकता है।
  • सहमति से पहले सूचित करें : शोध कार्य करने के दौरान अपने पार्टिसिपेंट्स या रेस्पॉन्डेंट्स को बता दें शोध कार्य का विषय, शोध को करने का कारण और उससे जुड़े नुक़सान या फ़ायदे। यह सब बताने के बाद ही रेस्पोंडेंट की सहमति से आंकड़े लें।
  • गुमनामी बनाए रखें : इस बात का ध्यान रखें कि आप किसी की निजी जानकारी न ले रहे हों। ज़्यादातर शोध कार्य का किसी की निजी जानकारी लेने से कोई वास्ता नहीं होता। कुछ भी ऐसा नहीं लिया जाता जिससे किसी की पहचान साबित हो रही हो।
  • नुक़सान की संभावना : शोध कार्य के दौरान यह तय करें आपके शोध कार्य से किसी का नुक़सान न हो। नुक़सान शारीरिक या मानसिक दोनों रूप में हो सकता है। गंभीर अध्ययन से जुड़े शोध कार्य के दौरान आप अपने रेस्पॉन्डेंट्स को ध्यान में रखकर और बताकर जानकारी लें।
  • गोपनीयता : शोध कार्य के दौरान आप रेस्पोंडेंट तक ये बात पहुंचाएं कि उनसे जुड़े आंकड़े किसी को शेयर नहीं किए जाएंगे। रेस्पोंडेंट की जानकारी सिर्फ़ और सिर्फ़ आप तक सीमित रहेगी। आप ही उसका प्रयोग अपनी रिसर्च में करेंगे।
  • सही परिणाम : शोध कार्य पूरा होने के बाद यह तय करें कि उसके परिणाम सही हों, आंकड़ों को दोहराया न गया हो, किसी के शोध को कॉपी न किया हो और परिणाम निकालने के सही तरीक़ों का प्रयोग किया हो। आपका शोध कार्य ट्रांसपेरेंट होना चाहिए।

इस तरह आप इन सब चीज़ों को ध्यान में रखकर अपना शोध कार्य आगे बढ़ा सकते हैं। शोध कार्य में पहले से ही साफ़ हो जाने पर रेस्पॉन्डेंट्स भी अच्छे से हिस्सा लेते हैं। आपका शोध कार्य सफलतापूर्वक संपन्न हो पाता है।

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