क्यों महिलाओं की उम्र बन जाती है चर्चा का विषय?

ऐज को लेकर लगातार सवाल और कमैंट्स सेल्फ एस्टीम(self-esteem) को प्रभावित कर सकती हैं। महिलाएं खुद को दूसरों की एक्सपेक्टेशन के अनुसार ढालने लगती हैं।

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Dimpy Bhatt
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why does women age become a topic of discussion

Photograph: (freepik)

सोसाइटी में अक्सर महिलाओं की ऐज को लेकर अननेसेसरी क्यूरोसिटी (curiosity) और कमेंटरी (commentary) देखने को मिलती है। चाहे करियर हो, शादी हो या मोथेरहुड— हर मोड़ पर ऐज को एक स्केल की तरह यूज़ किया जाता है। ये सोच न सिर्फ महिलाओं पर मेन्टल प्रेशर डालती है, बल्कि उनकी आइडेंटिटी को लिमिट्स भी करती है।

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क्यों महिलाओं की उम्र बन जाती है चर्चा का विषय?

1. शादी और “राइट ऐज” का प्रेशर 

कई सोसाइटीज में ये मान लिया गया है कि शादी की एक तय “ऐज ” होती है, खासकर महिलाओं के लिए। अगर कोई महिला 30 के बाद अन्मेरीड (unmarried)  है, तो सवालों की बौछार शुरू हो जाती है। ये प्रेशर उसे अपने डिसिशन पर शक करने के लिए मजबूर कर सकता है। जबकि सच ये है कि शादी एक परोसनल डिसिशन है, न कि ऐज की टाइम लिमिट।

2. मोथेरहुड(Motherhood) को ऐज से जोड़ना

मां बनने को भी अक्सर एक “डेडलाइन” के साथ जोड़ा जाता है। महिलाओं से उम्मीद की जाती है कि वो एक सर्टेन ऐज तक परिवार शुरू करें। हालांकि बायोलॉजिकल फैक्टर (biological factors) अपनी जगह सही हैं, लेकिन हर महिला की सिचुएशन, प्रिऑरिटीज़ और हेल्थ अलग होते हैं। फिर भी सोसाइटी के कमैंट्स उन्हें अननेसेसरी स्ट्रेस दे सकती है।

3. करियर और ऐज की तुलना

जब कोई महिला अपने करियर पर फोकस करती है, तो उसकी ऐज को लेकर कपरिसोन (comparisons) शुरू हो जाता है — “अब तो सेटल हो जाओ”  जैसी बातें कॉमन हैं। ऐज को अचीवमेंट का मेश़र बनाना गलत है। हर व्यक्ति की जर्नी और टाइम अलग होता है। महिलाओं की ऐज चर्चा का विषय इसलिए बन जाती है क्योंकि सोसाइटी ने उनके लाइफ के हर स्टेज के लिए “टाइमलाइन” तय कर रखी है।

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4. ब्यूटी और यंग दिखने का प्रेशर 

महिलाओं की ऐज को उनकी ब्यूटी से जोड़ दिया जाता है। रिंकल्स(wrinkles) , ग्रे हेयर(gray hair) या एजिंग सिग्न को छिपाने का सोशल प्रेशर ज्यादा होता है। इससे ये मैसेज जाता है कि यंग दिखना ही वैल्युएबल होना है, जो एक लिमिटेड और सुपरफिशल सोच है।

5. मेन्टल इम्पैक्ट और बदलाव की जरूरत

ऐज को लेकर लगातार सवाल और कमैंट्स सेल्फ एस्टीम(self-esteem) को प्रभावित कर सकती हैं। महिलाएं खुद को दूसरों की एक्सपेक्टेशन के अनुसार ढालने लगती हैं। जरूरत इस बात की है कि ऐज को एक नंबर की तरह देखा जाए, न कि आइडेंटिटी की डेफिनिशन की तरह। लेकिन असली चेंज तब आएगा, जब हम ऐज के बजाय एबिलिटी, एक्सपीरियंस और वेल बीइंग को महत्व देंगे।

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