गर्भवती महिलाओं में डिप्रेशन : जब गर्भवती महिलाएं डिप्रेशन से गुजरती हैं, तो यह उनके बच्चे के लिए हानिकारक होता है। इससे समय से पहले जन्म जैसी समस्याएं हो सकती हैं। प्रेगनेंट महिलाओं को COVID-19 संबंधित परेशानियों का भी खतरा होता है। स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी (Stanford University) की एक स्टडी से पता चलता है कि COVID-19 महामारी के बाद गर्भवती महिलाओं में डिप्रेशन का खतरा लगभग दोगुना हो गया है।

गर्भवती महिलाओं में डिप्रेशन : इस पर वैज्ञानिकों का क्या कहना है ?

वैज्ञानिकों ने गर्भवती महिलाओं के बीच COVID-19 महामारी से पहचाने जाने वाले तनाव की latent structure की जांच की। स्टडी में मार्च-मई 2020 के दौरान सैन फ्रांसिस्को खाड़ी क्षेत्र में 725 गर्भवती महिलाओं का सर्वे किया गया। महामारी से पहले वाले ग्रुप में, चार में से एक महिला में संभावित डिप्रेशन के लक्षण दिखाई दिए। जबकि, महामारी के बाद के ग्रुप में, यह आंकड़ा सर्वे में शामिल महिलाओं में से आधे से अधिक हो गया।

स्टडी में क्या मिला?

अध्ययन में पाया गया कि COVID-19 महामारी के दौरान डिप्रेशन के लक्षणों से ग्रस्त महिलाओं को पहले से ही सामाजिक आर्थिक असमानता के कारण चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा था। महिलाओं के इस समूह में वे भी शामिल थे जिनका पहले से खराब शारीरिक स्वास्थ्य और मानसिक विकारों (mental disorders) का इतिहास था।

यह उन लोगों को प्रभावित करता है जिन्हें वायरस वास्तव में कभी संक्रमित नहीं करता है। महामारी समाप्त होने के बाद भी इन प्रभावों के समाप्त होने की संभावना नहीं है। ऐसा इसलिए है क्योंकि गर्भावस्था में डिप्रेशन बढ़ते भ्रूण (foetus) और मां और नवजात शिशु के बीच संबंधों को प्रभावित कर सकता है।

इस तरह की स्टडी प्रेगनेंसी को विशेष रूप से एक महत्वपूर्ण अवधि के रूप में उजागर करती हैं। ऐसे में आपको महिलाओं को सपोर्ट देना चाहिए। प्रेगनेंट महिला को सिर्फ अच्छा खाना पीना देने से सबकुछ ठीक नहीं होगा ,उन्हें इमोशनल सपोर्ट भी देना होगा ताकि वह डिप्रेशन में न जाये।

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