Asha Parekh: २२ साल बाद किसी महिला को मिलेगा दादा साहब फाल्के अवार्ड

Swati Bundela
28 Sep 2022
Asha Parekh: २२ साल बाद किसी महिला को मिलेगा दादा साहब फाल्के अवार्ड

बॉलीवुड की दिग्गज अदाकारा आशा पारेख को इस बार 68वें नेशनल फिल्म अवॉर्ड में सिनेमा के सर्वोच्च सम्मान 'दादा साहब फाल्के अवार्ड' से सम्मानित किया जाएगा। फिल्म जगत उनके द्वारा योगदान के लिए उन्हें यह सम्मान दिया जाएगा।

22 साल बाद किसी महिला को मिलेगा अवॉर्ड

आपको जानकर हैरानी होगी कि दादा साहब फाल्के अवॉर्ड 22 साल के बड़े समय अंतराल के बाद किसी महिला को दिया जा रहा है। इससे पहले साल 2000 में यह सम्मान गायिका आशा भोसले जी को दिया गया था। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि साल 1969 मे देविका रानी इस अवॉर्ड को हासिल करने वाली पहली महिला कलाकार बनी थी। अब तक यह अवॉर्ड छ: महिलाओ को मिला है। जिसमे लता मंगेशकर, दुर्गा खोटे, कानन देवी और रूबी मेयर्स भी शामिल हैं। आशा पारेख यह सम्मान हासिल करने वाली सातवीं महिला हैं।

आशा पारेख का फिल्मी करियर

आशा पारेख का जन्म महाराष्ट्र के मुंबई में 2 अक्टूबर 1942 को हुआ था। 10 साल की उम्र से ही उन्होंने सिनेमा में काम करना शुरू कर दिया था। साल 1952 में आई फिल्म 'आसमान' में उन्होंने बतौर चाइल्ड आर्टिस्ट पहली बार काम किया था। इसके बाद 1954 में आई फिल्म 'बाप बेटी' में उन्होंने काम किया। लेकिन यह फिल्म फॉल्प रही और इसके बाद आशा जी सिनेमा से कुछ सालों तक दूर रही। 1959 में फिल्म 'दिल देके देखो' से उन्होंने सिनेमा में वापसी की। 

यह फिल्म काफी शानदार रही और आशा भोसले बॉलीवुड में सुपरस्टार के तौर पर जाने जाने लगी। इसके बाद उन्होंने कई सफल फिल्मों में अभिनय किया जैसे 'जब प्यार किसी से होता है', 'तीसरी मंजिल', 'बहारो के सपने', 'प्यार का मौसम' आदि। भारतीय सिनेमा में उन्हें 'द हिट गर्ल' के नाम से भी जाना जाता है। आशा ने अपने फिल्मी करियर के दौरान लगभग 95 फिल्मों में अभिनय किया है। साल 1999 में उन्होंने फिल्म 'सर आंखो पर' में आखिरी बार काम किया था। 

आशा पारेख अचीवमेंट 

1992 में उन्हें भारत सरकार ने देश के प्रतिष्ठित सम्मान 'पद्मश्री' से सम्मानित किया था। इसके साथ ही उन्हें 11 बार लाइफटाइम अचीवमेंट अवॉर्ड भी दिया जा चुका है। आशा पारेख भारतीय सेंसर बोर्ड की पहली महिला अध्यक्ष रही है। वर्तमान में आशा पारेख अपनी एक डांस एकेडमी चलाती इसका हैं। इसका नाम 'कारा भवन' है।

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