24 मार्च 2021 को जुवेनाइल जस्टिस अमेंडमेंट बिल लोकसभा द्वारा पारित किया गया था। इसे 15 मार्च को लोकसभा में पेश किया गया था। महिला और बाल विकास मंत्री स्मृति ईरानी ने 24 मार्च को लोकसभा में संशोधन बिल पारित किया। Juvenile Justice (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) Amendment Bill का उद्देश्य बच्चों की सुरक्षा के संबंध में प्रावधानों को मजबूत करना है।

जानिए , लोकसभा द्वारा पारित जुवेनाइल जस्टिस अमेंडमेंट बिल के बारे में ये ज़रूरी बातें :

  • Juvenile Justice Amendment Bill बच्चों की सुरक्षा और गोद लेने के प्रावधानों को मजबूत करता है। यह एक पैनल द्वारा उठाये गए मुद्दों को संबोधित करता है जो किशोर न्याय (बच्चों की देखभाल और संरक्षण) अधिनियम, 2015 के कामकाज पर ध्यान देता है।
  • अमेंडमेंट बिल में बच्चों की देखभाल और गोद लेने के मुद्दों के साथ जिला मजिस्ट्रेटों और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों की भूमिका बढ़ाने का प्रस्ताव है।
  • स्मृति ईरानी के मुताबिक़, पैनल ने Juvenile Justice Act के इम्प्लीमेंटेशन में कमियां पाईं। कानून का मकसद यह सुनिश्चित करना हैं कि “बच्चे का विक्टिम बनने तक का इंतजार किए बिना” कार्रवाई की जाए।
  • ईरानी ने कहा कि कई चाइल्ड केयर संस्थानों में बुनियादी सुविधाएं जैसे बिस्तर, पेयजल, शौचालय आदि नहीं हैं। उन्होंने यह भी कहा कि भारत में जितने भी चाइल्ड केयर संस्थान हैं उनमें से 90 प्रतिशत गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा चलाए जाते हैं।
  • बिल में अमेंडमेंट का उद्देश्य जिला मजिस्ट्रेटों और अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेटों को गोद लेने के अधिकार को ऑथोराइज़ करना और गोद लेने के आदेशों पर अपील का प्रस्ताव करना है।
  • Juvenile Justice Amendment Bill का उद्देश्य समिति के चयन के लिए सदस्यों की एजुकेशनल क्वालिफिकेशन और एलिजिबिलिटी शर्तों से संबंधित child welfare committees में प्रावधानों को शामिल करना है।
  • बिल में कहा गया है कि किसी भी व्यक्ति को child welfare committees के सदस्य के रूप में तब तक नियुक्त नहीं किया जाएगा जब तक कि वे कम से कम सात वर्षों तक बच्चों के संबंध में स्वास्थ्य, शिक्षा या कल्याणकारी गतिविधियों में शामिल न हों।
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