Kerala HC On Reproductive Choices: महिलाओं के प्रजनन विकल्पों पर कोई प्रतिबंध नहीं

Vaishali Garg
05 Nov 2022
Kerala HC On Reproductive Choices: महिलाओं के प्रजनन विकल्पों पर कोई प्रतिबंध नहीं

Kerala High Court On Reproductive Choices

Kerala HC On Reproductive Choices केरल हाई कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण आदेश पारित करते हुए कहा कि प्रजनन विकल्प एक महिला का अधिकार है। इस पर किसी भी प्रकार का प्रतिबंध नहीं होना चाहिए। आपको बता दें इस डिसीजन को लेते वक्त अदालत एमबीए की एक छात्रा द्वारा अनप्लैन्ड प्रेग्नेंसी के कारण अबॉर्शन के लिए दायर याचिका के एक मामले की सुनवाई कर रही थी।

समाज अक्सर प्रेग्नेंसी में महिला की पसंद को बहुत महत्व देता है सिर्फ यदि वह शादीशुदा हो तो और बच्चे को रखना चाहती हो तब, अगर वह शादीशुदा नहीं है तो वह अपने परिवार को शर्मसार कर रही है और यहां तक ​​​​कि उसे रखने और शादी करने के लिए मजबूर किया जा सकता है या अगर वह इसे रद्द करने का फैसला करती है, तो उसे 'क्रूर' होने के लिए फिर से शर्मिंदा किया जा सकता है। हालाकि, प्रेग्नेंसी पर एक महिला के अधिकार पर प्रकाश डालते हुए, केरल उच्च न्यायालय ने उल्लेख किया कि कोई भी महिला को उसके प्रजनन विकल्पों का प्रयोग करने से प्रतिबंधित नहीं कर सकता है और यह भारत के संविधान के अनुसार उसकी व्यक्तिगत स्वतंत्रता के भीतर है।

Kerala HC On Reproductive Choices प्रजनन विकल्पों पर केरल हाई कोर्ट

केरल एचसी के आदेश में कथित तौर पर कहा गया है, "एक महिला के अधिकार पर किसी भी प्रकार का कोई प्रतिबंध नहीं होना चाहिए, फिर वह अपनी प्रजनन पसंद का प्रयोग करने के लिए या तो प्रजनन करने या प्रजनन से दूर रहने के अधिकार का प्रयोग ही क्यों न करे। एक महिला का प्रजनन पसंद करने का अधिकार उसका इंडिविजुअल फ्रीडम का एक आयाम है, जिसे भारत के संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत समझा जा सकता है।

आपको बता दें की 23 वर्षीय एमबीए छात्रा द्वारा दायर याचिका की सुनवाई के दौरान यह बयान जारी किया गया था, जिसने अपने क्लासमेट के साथ सहमति से फिजिकल रिलेशन बनाया था और फिर प्रेगनेंट हो गई। हालांकि, प्रेग्नेंसी के बाद वह परेशान थी और उसका पार्टनर (बच्चे के पिता) हायर एजुकेशन के लिए विदेश चला गया। उसने abortion को फैसला लिया लेकिन किसी भी अस्पताल ने इसे मंजूरी नहीं दी क्योंकि 24 वीक से अधिक समय हो गया था। यही कारण था कि वह मदद के लिए केरल HC पहुंची।

अदालत ने इस पहलू पर विचार किया कि Pregnancy ने लड़की के जीवन के लिए खतरा पैदा कर दिया और उसे इसे अबॉर्ट करने की अनुमति दी।  कोर्ट ने government hospital से कहा कि वह इस प्रक्रिया को पूरा करने के लिए चिकित्सा पेशेवरों की एक टीम गठित करे और अगर वह जीवित पैदा होता है तो बच्चे को सर्वोत्तम चिकित्सा उपचार उपलब्ध कराएं।


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