सोनू सूद इस पान्डेमिक के समय में असली हीरो बन कर उभरे हैं जो बड़े बड़े ऑन स्क्रीन हीरो नही बन पाए। सोनू हर रोज़ कई माइग्रेंट मज़दूरों को वापस उनके घर भेज रहे हैं, बिना थके बिना रुके। उन्होंने अपना टोल फ्री नम्बर भी जारी किया है और किसी को भी अगर घर वापस जाना हो तो सोनू उन्हें वापस घर पहुँचा रहे हैं।

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पैदल क्यों जाओगे दोस्त?

अब जब सोनू सूद इस महामारी के दौर में एक असली हीरो बन के सामने आए हैं क्या हम ऑन स्क्रीन हीरो को वैसे ही देख पाएंगे जैसे पहले देखा करते थे?

क्या हम पहले जैसे ही उन हीरो के लिए तालियां बजायेंगे जो खूब बड़े बड़े डायलॉग्स और विलन को मार गिराते हैं या हम उन असली हीरोस और शीरोज़ की सराहना करेंगे जो हर रोज़ हमारे लिए काम कर रहे हैं, पाजिटिविटी ला रहें हैं और उनको खुशियां और राहत दे रहे हैं जिनको उसकी बहुत ज़्यादा ज़रूरत है?

जो हमें बड़े बड़े डायलॉग्स नही देते पर वो खुद ऐसा काम करते हैं कि उनके डायलॉग्स अपने आप बड़े हो जाते हैं जैसे सोनू सूद कहते हैं “पैदल क्यों जाओगे दोस्त?”

हीरो की छवि बदली सोनू ने

46 साल के हमारे सोनू पंजाब के एक छोटे से गांव मोंगा से आते हैं। सोनू सूद के मुंबई लोकल ट्रेन के पास की फ़ोटो आजकल सोशल मीडिया पर बहुत वायरल हो रही हैं। सोनू ने इस फ़ोटो को रीट्वीट करते हुए कहा कि “लाइफ एक सर्कल है”।

उनको अचानक से पॉपुलैरिटी नही मिली उन्होंने 90 की दशक में बहुत स्ट्रगल किया है और शायद इसी स्ट्रगल की वजह से उन्हें पता है कि मुसीबतें और दिक्कतें क्या होती हैं।

जो इंसान खुद मुम्बई की लोकल ट्रेन में ₹420 का पास बना कर ट्रेवल करे वो माइग्रेंट मज़दूरों का दर्द ना समझे ऐसा नही होसकता।

सोनू ने ऐसा क्या किया जो हम उन्हें असली हीरो बता रहे हैं

सोशल मीडिया से माइग्रेंट मज़दूरों से उनका पता पूछकर उनके लिए बस अरेंज कर उनको घर तक पहुँचाने के अलावा उन्होंने अपना मुम्बई वाला होटल डॉक्टर्स को रहने के लिए दिया है जहां ये कोरोना वारियर्स आराम से रह सकें।

कुछ ही दिनों पहले 177 बच्चियों को कोची से भुभनेश्वर अपने चार्टर्ड प्लेन से सुरक्षित पहुँचाया।

ट्विटर पर वो बहुत एक्टिव हैं और जैसे ही उन्हें पता चलता है कि मज़दूर कहीं पर फंसे हैं उन्हें तुरंत रिस्पांड कर के उनके मदद के लिए आगे आते हैं।

उन्होंने पिछले हफ्ते अपना टोल फ्री नम्बर भी लांच किया है।

हीरो वो भी होते हैं जो हमें बेहतर होने की प्रेरणा देते हैं, हमें दूसरों की मदद करने के लिए एनकरेज करते हैं और हमारा विश्वास फिर से उस बात में जगाते हैं कि हमें अपने आप से आगे दूसरों को भी देखना चाहिए।

क्यों सोनू सूद अलग हैं?

  • कितने ऐ लिस्ट हीरो और हीरोइन्स ने इस डेडिकेशन से काम किया है।
  • कितनों ने अपनी आकुलता के बजाय एक पाजिटिविटी का संदेश दिया।
  • कितनों ने आशा की किरण लोगों में भरी।
  • लोगों को दयालु बनने की प्रेरणा सोनू सूद के अलावा कौन दे रहा है?

हमें कैसे हीरो की ज़रूरत है?

इस वाकये से हम ये सीखते हैं कि हमें चकाचौंध से आगे बढ़ के बॉडी बिल्डिंग से आगे बढ़ के (सोनू के पास तो खैर सब है) उन लोगो को हीरो मानें जिनके पास दिल में दया है, प्यार है और जुनून है कि वो लोगों की मदद कर सकते हैं।

कौन होते हैं हीरो?

हीरो हमेशा वो लोग नही होते जो हर गलत काम का बदला लें और जनता की बदले की भावना को दर्शाएं। बल्कि हीरो वो भी होते हैं जो हमें बेहतर होने की प्रेरणा देते हैं, हमें दूसरों की मदद करने के लिए एनकरेज करते हैं और हमारा विश्वास फिर से उस बात में जगाते हैं कि हमें अपने आप से आगे दूसरों को भी देखना चाहिए।

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