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सुशांत सिंह राजपूत की दिल बेचारा सिखाएगी प्यार करना

Published by
Katyayani Joshi

सुशांत सिंह राजपूत की फ़िल्म दिल बेचारा का ट्रेलर आ चुका है। कुछ ही मिनटों में ये ट्रेलर हमे हँसी के रोलर कोस्टर पर ले जाता है और दूसरे ही पल हमारी आंखों मे आँसू भी ले आता है।

मुकेश छाबड़ा द्वारा डायरेक्ट की हुई ये फ़िल्म जॉन ग्रीन की बुक “द फाल्ट इन आवर स्टार्स” पर बेस्ड है। फ़िल्म में लीड रोल निभाते हुए दिख रहे हैं सुशांत सिंह राजपूत और संजना संघी वहीं कैमिया में सैफ अली खान और स्वास्तिका मुखर्जी हैं। इस फ़िल्म का म्यूजिक दिया है ए. आर रहमान ने।

ट्रेलर

ये फ़िल्म 2 यंग एडल्ट्स किज़ी और मैनी की कहानी है जिसमें वो मिलते हैं और प्यार हो जाता है। इसमें क्या नया है? मैनी ऑस्टियोसार्कोमा (एक प्रकार का बोन कैंसर) से उबर चुका है और किज़ी को थाइरोइड कैंसर है।

ट्रेलर के पहले हाफ में हम मैनी के चीयरफुल अंदाज़ को देखते हैं जहां वो किज़ी को ज़िन्दगी जीना सिखाता है। दूसरे हाफ में हम इमोशनल मोमेंट्स देखते हैं जब उन दोनों को पता चलता है कि उनके पास समय कम है।

नज़रिए का फर्क दिखाता है ट्रेलर

नावेल की तरह मैनी और किज़ी की कहानी दिखाती है कि ज़िन्दगी कितनी नाज़ुक है और मौत कितनी आकस्मिक(unexpected)।

दोनों ज़िन्दगी और मौत को शुरुआत और अंत के रूप में देखते हैं। पर दोनो की ज़िंदगी को देखने और अपनी बीमारी को देखने का नज़रिया कितना अलग है ये ट्रेलर में दिखाया गया है।

किज़ी मैनी और राजा रानी की कहानी

किज़ी अपने में रहने वाली एक लड़की है जबकि मैनी एक मज़ाकिया एक्सट्रोवर्ट है। किज़ी ने कैंसर और ज़िन्दगी से हार मान ली है “एक था राजा एक थी रानी दोनों मर गए खत्म कहानी” पर मैनी उसको याद दिलाता है कि कैंसर उनका प्यार उनसे नहीं छीन सकता “एक था राजा एक थी रानी दोनों मर गए खत्म कहानी पर ये कहानी अधूरी है उसे कैसे पूरी करना है वो राजा और रानी तय करेंगे”।

फिर वो साथ मे वो अपने बारे मे और ज़िन्दगी के बारे में सारी खूबसूरत चीज़ें डिस्कवर करते हैं जो पहले मौत आने के गम से छुपी हुईं थीं।

ज़िन्दगी लंबी नहीं बड़ी होनी चाहिए

फ़िल्म के प्लाट की बात करें तो ये दिल छूने वाली रोमांटिक फिल्म बात करती है कि कैसे ज़िन्दगी बहुत छोटी है बिना हंसे बिना प्यार के जीने के लिए। जो आज है वो शायद कल ना हो।

सब के पास लिमिटेड समय है इसलिए हर किसी को अपनी ज़िंदगी खुल कर जीनी चाहिए। मैनी के अनुसार “जन्म कब लेना है और कब मरना है ये हम डिसाइड नहीं कर सकते पर कैसे जीना है वो हम डिसाइड कर सकते हैं।”

अभी करें वो सब जो बाद में करने का सोचा है

जो बाद में करने की प्लानिंग की है उसे तुरंत करना चाहिए। जिस ट्रिप पर जाना चाहिए उस ट्रिप पर जाएं, अपने दोस्तों पर जो प्रैंक खेलना था खेलें, मोमेंट गुज़र जाने से पहले ढेर सारे आई लव यू बोलें, क्या पता वो इंसान या हम कल रहे ना रहे।

ये फ़िल्म देखने के लिए हौसला चाहिए। दिल बेचारा हम आसानी से नहीं देख पाएंगे आखिर सुशांत के गुज़र जाने का दर्द अब भी हम में जिंदा है।

और पढ़िए- सुशांत सिंह राजपूत के मूवी ट्रेलर ने किया हम सब का दिल बेचारा…

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