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जानिए निधि राज़दान का क्या कहना है नेपोटिस्म पर

Published by
Katyayani Joshi

देश की टॉप जॉर्नलिस्ट निधि राजदान ने टीवी दुनिया को छोड़ कर हावर्ड यूनिवर्सिटी में एसोसिएट प्रोफेसर के रूप में पढ़ाने जा रहीं हैं। शैली चोपड़ा से बातचीत में निधि राज़दान ने सोशल मीडिया और उनके नेपोटिस्म के बयान पर ट्रोलिंग के बारे में बताया।

क्या ट्रोलिंग की वजह से आपका हौसला टूटा?

मैंने सोशल मीडिया बहुत पहले ही छोड़ दी थी। मुझे कभी भी सोशल मीडिया पसंद नहीं थी ना अभी है। मैं सिर्फ इसलिए ट्विटर पर हूँ क्योंकि लोग मेरे नाम से फेक एकाउंट्स बना रहे थे।

नेपोटिस्म हर फील्ड में होने का मतलब है कि कुछ के पास अवसरों में अनफेयर एडवांटेज है। पर सिर्फ अपने माता पिता के बच्चे होने की वजह से आप इंडस्ट्री में सर्वाइव नहीं कर पाएंगे। – निधि राज़दान

तो सबको लगता था कि वो सब मैं ट्वीट करती हूं और वो मेरे व्यू पॉइंट्स हैं। ट्विटर ने मुझे वापस आने को कहा और वेरिफ़ाइड एकाउंट चलाने के लिए कहा ताकि लोग फेक एकाउंट्स की फेक कमेंटरी पर विश्वास ना करें। ये सबसे बड़ा कारण है कि मैं वापस आयी सोशल मीडिया पर।

बॉलीवुड में नेपोटिस्म की डिबेट आजकल बहुत ज़्यादा होरही है। पर ये हर सेक्टर में है। क्या आप कहेंगी कि मीडिया में भी नेपोटिस्म है?

लोगों को लगता है कि मेरे पिता जॉर्नलिस्ट है और वो एक टॉप एडिटर थे तो इसलिए मुझे शायद एनडीटीवी में नौकरी मिली। पर मैं अभी ही इस भ्रम को तोड़ना चाहती हूं। मैंने जब सबसे पहले 1999 में एनडीटीवी में इंटर्नशिप के लिए अप्लाई किया था पर उन्होंने मुझे रिजेक्ट कर दिया ये कहके कि वो इन्टर्नस नहीं लेते।

मेरे पिता कभी भी प्रणय और राधिका रॉय को नहीं जानते थे। वो उनसे तभी जानने लगे जब मुझे हायर(hire) किया गया। मैंने अपना सीवी एनडीटीवी ऑफिस में छोड़ दिया और मुझे 6 महीने बाद कॉल आया जहां रिपोर्टिंग पर्सन के लिए 8-10 लोगों का इंटरव्यू लिया गया।

और मुझे जॉब इसलिए नहीं मिली कि मेरे पिता ने प्रणय रॉय से फ़ोन पर बात की थी।जहां तक मेरा सवाल है ये मेरी कहानी है ।

नेपोटिस्म हर फील्ड में होने का मतलब है कि कुछ के पास अवसरों में अनफेयर एडवांटेज है। पर सिर्फ अपने माता पिता के बच्चे होने की वजह से आप इंडस्ट्री में सर्वाइव नहीं कर पाएंगे।

आप जो कर रहे हैं अगर आप उसमें अच्छे नहीं हैं तो अगर आप पोलिटिशन हों या एक्टर जो भी आपको हटा दिया जाएगा। हां आपके पास एडवांटेज है पर ये आप के ऊपर है कि आप उस अवसर का कैसे यूज़ करते हैं।

और पढ़िए- मेरे लिए हार्वर्ड में पढ़ाना एक बहुत बड़ा अवसर है – निधि राज़दान

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