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क्या लड़कियां अपने पेरेंट्स के सपने पूरे नहीं कर सकती हैं?

हमारा समाज आज भी इतना पिछड़ा हुआ है कि यहाँ जब सपनों की बात आती है या अपने पूरे करने की बात आती है तो इसे सिर्फ लड़कों से जोड़ा जाता है। लड़कियां अपने या अपने पेरेंट्स के सपने नही पूरे कर सकती हैं यह आज भी माना जाता है।

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Priya Singh
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Girl with her parents

Why do people say that girls cannot fulfill their parent's dreams?: हमारा समाज आज भी इतना पिछड़ा हुआ है कि यहाँ जब सपनों की बात आती है या अपने पूरे करने की बात आती है तो इसे सिर्फ लड़कों से जोड़ा जाता है। लड़कियां अपने या अपने पेरेंट्स के सपने नही पूरे कर सकती हैं यह आज भी माना जाता है। हम सभी को अक्सर यह बात सुनने को मिल ही जाती है किसी न किसी से की सपने पूरे करने का काम लड़कों का है लड़कियों को तो शादी करके पराए घर जाना है। खैर इसमें बात में कोई सच्चाई तो नही है लेकिन हाँ यह बात हमारे समाज की पित्रसत्तात्मक सोच और रूढ़िवादिता को जरुर उजागर करती है। आज कल जब लड़कियां टेक्नोलॉजी से लेकर स्पेस तक हर जगह काम रही हैं और जा रही हैं। ऐसे में भी कुछ जगहों पर समाज का यही मानना है कि लड़कियां सिर्फ खाना बनाने और परिवार सम्भालने के लिए हैं वह अपने पेरेंट्स के अपने पूरे नही कर सकती हैं क्योंकि उन्हें शादी करके किसी और के घर जाना है। वो पराई अमानत हैं। लेकिन बदलते हुए समय के साथ इस बात में पर यकीन करना या इसे सच मानना किसी बेवकूफी से अधिक तो नही समझा जाना चाहिए।

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क्या लड़कियां अपने पेरेंट्स के सपने पूरे नहीं कर सकती हैं?

देखिये अगर हम इस मुद्दे की बात करें कि लड़कियां अपने पेरेंट्स के सपनों को पूरा नहीं कर सकती है या कर सकती हैं तो इसका सीधा सा जवाब है कि क्यों नहीं? जरुर कर सकती हैं। जैसे लड़के अपने पेरेंट्स के सपनों को पूरा कर सकते हैं बिलकुल वैसे ही लड़कियां भी कर सकती हैं। यह सिर्फ लड़कों का काम नही है कि अपने पेरेंट्स का सपना पूरा करें और न ही लड़के कुछ ऐसा ख़ास कर सकते हैं जो लड़कियां नहीं कर सकती हैं। लड़कियां भी अपने पेरेंट्स के सपनों को पूरा कर सकती हैं और उन्हें गर्व महसूस करा सकती हैं। लेकिन जरूरी है कि पेरेंट्स लड़कियों को पराया धन समझकर शादी करने के विचार से ऊपर उठकर उन्हें आगे बढ़ने का मौका दें उन्हें इतना काबिल बनने दें कि वे सपने पूरे करने लायक बन सकें। सपोर्ट की जरुरत हर किसी को है लड़के भी बिना सपोर्ट के सपने पूरे करने के काबिल नहीं बनते हैं उनकी भी सहायता और सपोर्ट पेरेंट्स करते हैं। ऐसा ही सपोर्ट अगर लड़कियों को मिले तो वह आपको गर्व महसूस करने का मौका जरुर देंगी और आपके अधूरे सपनों को पूरा करने में जान लगा देंगी। आइये जानते हैं कि कैसे पेरेंट्स अपनी बेटियों का सपोर्ट करें ताकि वे काबिल बन सकें और पेरेंट्स के सपनों को पूरा कर सकें।

लड़की पराया धन नही है

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अक्सर हमारा समाज पूराने समय से यह कहता आया है कि लड़की पराया धन है। लड़कियों को पराया धन समझने की जगह अपनी बेटी मानिए और उसका साथ और सपोर्ट इसलिए करिये कि आगे चलकर वो आपके सपनों को पूरा कर सके। यह समझकर कि वह पराया धन है इसलिए उसकी पढ़ाई और ग्रोथ पर अंकुश मत लगाइए। 

शादी से ज्यादा शिक्षा जरूरी है

देखिये शादी करना या न करना अलग बात है लेकिन शिक्षा न देना गलत है। अगर पेरेंट्स अपनी बेटियों को शिक्षा ही नही देंगे तो वे आगे नहीं बढ़ सकेंगी। इसलिए शादी के बारे में सोचने की जगह पहले लड़कियों की शिक्षा के बारे में ध्यान दिया जाए उन्हें शिक्षित किया जाए ताकि वे आगे बढ़ सकें और अपने और आपने पेरेंट्स के सपनों को पूरा कर सकें। 

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आज़ादी है जरूरी

समाज और लोगों के डर से लड़कियों को घर में बंद रखना और कुछ गलत होने के डर से उन्हें बाहर ना निकलने देना उनकी ग्रोथ को बढ़ने से रोकता है। यह सबसे बड़ा कारण है कि ज्यादातर लड़कियां लड़कों की तरह काबिल नहीं बन पाती हैं क्योंकि उन्हें अलग-अलग तरह की पाबंदियों का सामना करना पड़ता है। पेरेंट्स को अपनी बेटियों का सपोर्ट करना चाहिए और उन्हें बाहर निकलने देना चाहिए ताकि वे दुनिया को बेहतर समझ सकें और आगे बढ़ सकें। भरोसा करना जरूरी है।  

समाज के हिसाब से ना चलकर जो सही है उसपर ध्यान दें

आप एक पेरेंट्स होने के नाते समाज की रूढ़िवादिता से आगे निकलें और समाज के हिसाब से न चलकर जो सही है उसे अपनाएं समाज लड़कियों को शिक्षित करने से कहीं अधिक उनकी शादी पर जोर देता है लेकिन ऐसा करना ना सिर्फ लड़कियों के लिए गलत है बल्कि आने वाली पीढ़ियों को इसका बहुत ही नुकसान उठाना पड़ेगा। इसलिए रुढियों से आगे निकलना आवश्यक है। 

लड़कियां पेरेंट्स के सपने parent's dreams
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