Judged For Applying Makeup: क्यों समाज मेकअप करने पर जज करता है?

Swati Bundela
26 Sep 2022
Judged For Applying Makeup: क्यों समाज मेकअप करने पर जज करता है?

क्या मेकअप करना ज़रूरी है? क्या मेकअप सिर्फ़ लड़कियाँ ही कर सकती है? हमारा समाज मेकअप के लिए दोगलापन रखता है।कोई लड़की अगर ज़्यादा  मेकअप कर  ले तो वह कैरिक्टरलेस बन जाती है या फिर वह लड़कों को दिखाने के लिए पहन रही है।आज हम बात करेंगे समाज मेकअप के प्रति क्या रवैया रखता है।

सिर्फ़ लड़कियाँ ही कर सकती है मेकअप?

पहली बात तो मेकअप कोई भी कर सकता है। यह बिल्कुल नही कि मेकअप सिर्फ़ लड़कियाँ कर सकती है।मेकअप की खोज भी सबसे पहले एक मर्द ने की थी जिनको सब मैक्स फ़ैक्टर बुलाते थे। उनका असली नाम मैक्समिलन फ़ैक्टोरोविक्ज था।वे एक ब्‍यूटीशियन और बिज़्नेसमैन है। इसके साथ ही उन्होंने मैक्स फ़ैक्टर कम्पनी की भी स्थापना भी की है।
 
कृपया जज करना बंद करें 

समाज में अक्सर हमारे भारतीय परिवारों में लड़कियों को जज किया जाता है अगर वे कम मेकअप करें तो उनको कहा जाता है मर्दों की तरह लग रही। लड़की को हिसाब से मेकअप करना चाहिए अगर वे ज़्यादा कर ले तो किस के लिए इतना मेकअप किया है? शादी के बाद करना जितना मेकअप करना है। संस्कारी लड़कियाँ इतना मेकअप नहीं करती।

मेकअप करना या नहीं करना एक व्यक्तिगत फैसला है

मेकअप किसी की पर्सनल पसंद है। इसमें किसी को जज नहीं करना चाहिए। अगर कोई मेकअप नहीं करता  तब भी ठीक है। अगर किसी की ज़्यादा पसंद है वो भी उसकी अपनी पसंद है। इस पर किसी को जज करने का अधिकार नहीं है।

लड़के भी कर सकते है मेकअप 

अभी भी हमारे समाज ज़्यादातर लोग यह ही समझते है कि मेकअप सिर्फ़ लड़के कर सकते है परंतु ऐसा नहीं है। मेकअप का  कोई जेंडर नहीं होता। कोई भी व्यक्ति  निरपेक्ष किसी जेंडर के मेकउप कर सकता है।

मेकअप आपको कॉन्फ़िडेन्स देता है 

बहुत से लोगों को मेकअप कॉन्फ़िडेन्स है। वह लोगों को समाजिक होने में मदद करता है क्योंकि हमारा समाज लोगों को उनकी भेशभूषा से जज करता है। हमारे समाज में आज भी लोगों को सुंदर या भद्दा बोला  जाता है।

लड़कियों के लिए मेकअप ज़रूरी नहीं है

हमारे समाज में यह धारणा है कि लड़कियों तो मेकअप करने वाले होती है। लड़कियाँ अपने सारे पैसे मेकअप पे खर्च करती है। ज़रूरी नहीं हर लड़की मेकअप करती हो।बहुत सी लड़कियाँ होती है जिन्हें मेकअप पसंद नहीं है।उन लड़कियों के बारे में समाज को कोई राय बनाने का हक़ नहीं है।

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