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Raising Children: क्यों हमें अपने बच्चों को थप्पड़ नहीं मारना चाहिए ?

पेरेंटिंग: बच्चों को थप्पड़ मारना न केवल शारीरिक नुकसान पहुंचाता है, बल्कि उनके मानसिक और भावनात्मक विकास पर भी नकारात्मक प्रभाव डालता है। शारीरिक दंड से बच्चे भयभीत हो सकते हैं, आत्मविश्वास खो सकते हैं और उनके संबंधों में दरार आ सकती है।

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Trishala Singh
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Raising Children

(Credits: Freepik)

Why We Should Not Slap Our Children: बच्चों की परवरिश में अनुशासन एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, लेकिन अनुशासन सिखाने के तरीके भी बहुत मायने रखते हैं। थप्पड़ मारना एक ऐसा तरीका है जो बच्चों पर गहरा नकारात्मक प्रभाव डाल सकता है। इसलिए, यह समझना आवश्यक है कि हमें अपने बच्चों को थप्पड़ क्यों नहीं मारना चाहिए।

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Raising Children: क्यों हमें अपने बच्चों को थप्पड़ नहीं मारना चाहिए ?

1. भावनात्मक और मानसिक प्रभाव

थप्पड़ मारने से बच्चों पर गहरा भावनात्मक और मानसिक प्रभाव पड़ सकता है। इससे बच्चे डर, चिंता और आत्म-सम्मान की कमी का शिकार हो सकते हैं। जब बच्चे को थप्पड़ मारा जाता है, तो वह यह महसूस करता है कि उसके माता-पिता उसे समझने की बजाय उसकी गलतियों के लिए उसे दंडित कर रहे हैं। इससे बच्चे में आत्मविश्वास की कमी हो सकती है और वे अपनी भावनाओं को व्यक्त करने में असमर्थ हो सकते हैं।

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2. हिंसा ही समाधान है

थप्पड़ मारना एक प्रकार की हिंसा है और यह बच्चों को यह संदेश देता है कि समस्याओं का समाधान हिंसा से किया जा सकता है। बच्चे अक्सर अपने माता-पिता के व्यवहार की नकल करते हैं। यदि वे देखते हैं कि उनके माता-पिता हिंसा का उपयोग कर रहे हैं, तो वे भी अपने दोस्तों या सहकर्मियों के साथ हिंसक व्यवहार कर सकते हैं। यह हिंसा का चक्र बन जाता है जिसे रोकना मुश्किल हो जाता है।

3. शारीरिक नुकसान

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थप्पड़ मारने से बच्चों को शारीरिक नुकसान भी हो सकता है। यह चोट, खरोंच या गंभीर चोट का कारण बन सकता है। बच्चों की त्वचा और शरीर संवेदनशील होते हैं और थप्पड़ मारने से उन्हें दर्द होता है। शारीरिक नुकसान के अलावा, यह उनके विकास को भी प्रभावित कर सकता है।

4. विश्वास 

बच्चों को थप्पड़ मारने से उनके और उनके माता-पिता के बीच विश्वास का नुकसान हो सकता है। जब बच्चे को लगता है कि उसके माता-पिता उसे चोट पहुंचा सकते हैं, तो वह उनसे अपनी समस्याओं और भावनाओं को साझा करने से कतराता है। इससे माता-पिता और बच्चों के बीच की दूरी बढ़ जाती है और संवाद की कमी हो जाती है।

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5. सकारात्मक तरीके

बच्चों को अनुशासन सिखाने के कई सकारात्मक तरीके होते हैं जो थप्पड़ मारने की तुलना में अधिक प्रभावी होते हैं। बच्चों को समझाने, संवाद करने, और उन्हें उनके व्यवहार के परिणामों के बारे में बताने से वे बेहतर तरीके से सीख सकते हैं। उदाहरण के लिए, यदि बच्चा कोई गलती करता है, तो उसे शांतिपूर्वक समझाना कि उसने क्या गलत किया और उसे सही तरीका दिखाना अधिक प्रभावी होता है। 

6. लंबे समय के प्रभाव

थप्पड़ मारने का बच्चों पर लंबे समय तक नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। इससे वे आक्रामक हो सकते हैं, सामाजिक समस्याओं का सामना कर सकते हैं, और उनके शैक्षणिक प्रदर्शन पर भी असर पड़ सकता है। ऐसे बच्चे जिनका अक्सर शारीरिक दंड किया जाता है, वे बड़े होकर भी हिंसक प्रवृत्तियों का शिकार हो सकते हैं और उनकी मानसिक स्थिति भी स्थिर नहीं रहती।

बच्चों को थप्पड़ मारना एक अनुचित और अनावश्यक तरीका है जो उन्हें शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बजाय, माता-पिता को सकारात्मक अनुशासन के तरीकों को अपनाना चाहिए जो बच्चों को सिखाते हैं कि कैसे समस्याओं का समाधान शांति और समझदारी से किया जा सकता है। संवाद, धैर्य और समझदारी से बच्चों को सही मार्ग दिखाना न केवल उन्हें बेहतर इंसान बनाता है, बल्कि परिवार में भी प्यार और विश्वास का माहौल बनाता है।

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