What is Superfetation: प्रेग्नेंट रहते दोबारा प्रेग्नेंट हो सकते है?

क्या कभी आपने ऐसा सुना है कि कोई महिला प्रेग्नेंट होने के साथ ही दोबारा प्रेग्नेंट हो गई हो? ऐसा होना संभव है। इस स्थिति को सुपरफिटेशन कहा जाता है।

Monika Pundir
12 Dec 2022
What is Superfetation: प्रेग्नेंट रहते दोबारा प्रेग्नेंट हो सकते है?

Superfetation

What is Superfetation: प्रेग्नेंट होने पर क्या दोबारा प्रेग्नेंट हो सकते हैं?

क्या कभी आपने ऐसा सुना है कि कोई महिला प्रेग्नेंट होने के साथ ही दोबारा प्रेग्नेंट हो गई हो? जुड़वा बच्चों से एक साथ प्रेग्नेंट होना अलग है और एक बार गर्भधारण करने पर दोबारा गर्भवती होना अलग है। लेकिन ऐसा होना संभव है। एक महिला गर्भवती होने के बाद भी दोबारा गर्भधारण कर सकती हैं। इस स्थिति को सुपरफिटेशन कहा जाता है।

क्या होता है सुपरफिटेशन?

सुपरफिटेशन उस स्थिति को कहा जाता है जब एक बार गर्भवती होने के बाद एक महिला दोबारा से गर्भधारण कर ले। जब एक महिला पहली बार गर्भवती होती है तो उसके कुछ दिन बाद या फिर लगभग एक महीने बाद जब दोबारा स्पर्म एग के संपर्ग में जाता है और फर्टिलाइज हो जाता है तो इस वजह से फिर नई प्रेग्नेंसी की शुरुआत होती है। ज्यादातर जुड़वा बच्चों का जन्म सुपरफिटेशन से ही होता है, यह बच्चे या तो एक साथ पैदा होते हैं या फिर एक ही दिन पैदा होते हैं।

सुफरफिटेशन कब होता है?

गर्भवती महिलाओं में ओवुलेशन होने के बाद सुपरफिटेशन होने की संभावना ज्यादा होती है। अल्ट्रासाउंड करवाने पर सुपरफिटेशन की स्थिति का पता लगता है। प्रेग्नेंसी के बाद ओवुलेशन नही हो पाता है क्योंकि गर्भवती होने के बाद महिलाओं के शरीर में होने वाले हार्मोनल बदलाव ओवुलेशन के प्रोसेस को रोक देते हैं। यही वजह है कि सुफरफिटेशन के केसेस ज्यादा देखने को नहीं मिलते हैं। अगर आप आईवीएफ (IVF) से प्रेग्नेंट हो रही हैं तो इस प्रक्रिया में फर्टिलाइज्ड भ्रूण को गर्भ में डाला जाता है। अगर इस प्रोसेस के दौरान महिला ओवुलेट हो जाए तो तब एग फर्टिलाइज्ड हो सकता है और तब सुपरफिटेशन होने के चांसेस हो जाते हैं।

सुपरफिटेशन में क्या परेशानियां होती हैं?

इस तरह की प्रेग्नेंसी में बच्चों के विकास पर असर पड़ता है। इस तरह की प्रेग्नेंसी में भ्रूण अलग अलग समय पर होता है जिस कारण विकास भी अलग अलग समय पर होता है। ऐसी स्थिति में डिलीवरी के समय पहले बच्चा आ जाता है और चूँकि बाद में बने दूसरे भ्रूण को विकास के लिए पर्याप्त समय नहीं मिल पाता है तो दूसरे बच्चे की डिलीवरी प्रीमैच्योर होती है। ऐसे में प्रीमेच्योर बेबी को काफी समस्या हो सकती हैं, उसे सांस लेने में तकलीफ हो सकती है, वजन कम होता है, यहां तक कि ब्रेन हेमरेज होने का खतरा भी रहता है। इस स्थिति में महिला को हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज होने का खतरा रहता है।

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