शांति तिग्गा कौशल और टफनेस की एक्सएम्पल थीं जो अपने पुरुष कॉउंटेरपार्ट्स को पीछे छोड़ टेरीटोरियल आर्मी में शामिल हुई थीं। एक विधवा जिन्होंने अपने पति को 35 साल की उम्र में खो दिया था, रिक्रूटमेंट कैम्प में हिस्सा लेकर वो अपने फायरिंग स्किल्स में पहले नंबर पर आने वाली महिला बनीं।

उनको पूर्व राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल द्वारा उनके एक्स्ट्रा आर्डिनरी कामों के लिए सम्मानित भी किया गया था। शांति पश्चिम बंगाल से थीं। वो 13 मई 2013 को सदिंग्ध परिस्थितियों में मृत पायी गयीं।

जेंडर, मदरहूद सबके बैरियर्स तोड़े

शांति 35 साल की महिला थी जो 2 बच्चों की मां थी जब उन्होंने आर्मी जॉइन की। उन्हें फिट करार दिया गया और उन्होंने ये फायरिंग एक्सरसाइज और ड्रिलिंग में इंस्टिट्यूट में टॉप करके प्रूव भी किया। उम्र, जेंडर, मदरहुड के बैरियर्स को पीछे छोड़कर वो भारत की 125 साल पुरानी आर्मी की पहली महिला जवान बनीं।

शुरुआती ज़िन्दगी

डिस्ट्रिक्ट जलपैगुरी में जन्म लेने वाली शांति शेड्यूल्ड ट्राइब से थीं। उस समय बाल विवाह काफी प्रचलित(prevalent) था। शांति की 17 साल की उम्र में शादी कर दी गयी थी और जल्द ही उनके दो बच्चे भी होगये। वो एक हॉउसवाइफ थीं। चीजें बदल गईं जब उनके पति का 2005 में निधन होगया।

रेलवे में नौकरी फिर टेरीटोरियल आर्मी के लिए वालंटियर

उनको रेलवे द्वारा कंपनसेशन के रूप में जॉब आफर की गई और उन्होंने पॉइंट्स मैन के रूप में काम करना शुरू किया। वो अपने डिस्ट्रिक्ट जलपैगुरी के चलसा रेलवे स्टेशन पर पोस्टेड थीं। शांति ने 2013 में टेरीटोरियल आर्मी के लिए वालंटियर किया।

शांति तिग्गा का हमेशा से सपना रहा था कि वो आर्मी जॉइन करें ओलिव ग्रीन यूनिफार्म पहनें और गन्स चलाएं।1.3 मिलियन शक्तिशाली डिफेंस फ़ोर्स में तिग्गा पहली महिला जवान बनीं। उन्होंने अपने बैच में टॉप किया और रिक्रूटमेंट में सारे पुरूष कॉउंटेरपार्ट्स को पीछे छोड़ दिया।

उपलब्धियां

तिग्गा ने अपने सारे टेस्ट्स क्लियर कर के 969 रेलवे इंजीनियर रेजिमेंट ऑफ टेरीटोरियल आर्मी 2011 में जॉइन की। फिजिकल टेस्ट में उन्होंने सबको पछाड़ दिया।

रिपोर्ट्स के अनुसार शांति ने 1.5 किलोमीटर की रेस में बाकी पुरुषों से 5 सेकंड पहले ही रेस खत्म कर दी थी। उन्होंने 50 मीटर की रेस 12 सेकंड में खत्म कर दी थी।

सीनियर अफसर ने कहा,”महिलाओ को डिफेंस फोर्सेस में आना ऐलाउड है पर सिर्फ नॉन कॉम्बैट यूनिट में ऑफिसर्स के रूप में। पर तिग्गा ने ये पहली महिला जवान होने की यूनिक डिस्टिंक्शन कमाई है।”

दुखद अंत

शांति तिग्गा काफी संदेहास्पद(mysterious) स्तिथियों में मृत पायीं गयीं। उनकी फैमिली ने उनके मर्डर की बात कही। शांति को कुछ अनजान लोगों ने 9 मई 2013 की शाम को किडनैप किया और उन्हें रेलवे ट्रैक्स के पास वाली पोस्ट पर ब्लाइंडफोल्ड करके बांध दिया। इस घटना के बाद वो अस्पताल में अंडर ऑब्जरवेशन रहीं।

एक सुबह उन्हें फांसी पर लटकता हुआ पाया गया। कुछ रिपोर्ट्स के अनुसार शांति को पैसे लेने और लोगो को नौकरी का झांसा देने के गलत मामले में फंसाया जारहा था इसलिए उन्होंने परेशान होकर अपनी जान दे दी।

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