Accept Depression: डिप्रेशन के प्रति नज़रिया बदलने की ज़रूरत

Rajveer Kaur
11 Oct 2022
Accept Depression: डिप्रेशन के प्रति नज़रिया बदलने की ज़रूरत

डिप्रेशन को आज भी हमारे समाज इतना गंभीर नहीं लिया जाता है लेकिन अगर इसका सही समय पर इलाज नहीं कराया गया तों यह एक गंभीर रूप ले सकता है। आज भी शारीरिक तौर पर बीमारी को ज़्यादा तरजीह दी जाती है वही पर मानसिक बीमारी को इतना सीरीयस नहीं लिया जाता और अगर कोई आपको इसके बारे में बताए भी फिर भी उसका मज़ाक़ बनाया या फिर उस बात को सच नहीं माना जाता है। आज हम बात करेंगे कि डिप्रेशन बताने पर सामने वाले व्यक्ति का क्या रीऐक्शन होता है -

डिप्रेशन बताने पर सामने वाले व्यक्ति का क्या रीऐक्शन होता है -

डिप्रेशन कुछ नहीं होता है

आज भी जब आप घर परअपनी माँ या किसी और इसके बारे में बताते हो तों सामने वाले का यहीं जवाब होता है कि डिप्रेशन-विप्रेशन कुछ नहीं होता है। हमें तो ऐसा कुछ भी नहीं ऐसा कभी। यह टर्म तों विदेश से आईं है। उनके चोंचले है यह चीजें। ऐसा कुछ नहीं होता है।

यह ड्रामे हैं बस 

यह भी जवाब अक्सर सुनने को मिलता है कि डिप्रेशन कुछ नहीं है। बस काम ना करने के बहाने है। यह तों ब ड्रामे कर रही है। काम ना करना हो तो कह दो डिप्रेशन हैं हमें।आज भी माँ-बाप डिप्रेशन के नाम पर बच्चों को यह सब कह देते है।जब वे कह देते है कि ड्रामे कर रही है ऐसे बच्चों को ज़्यादा डिप्रेशन में चले जाते क्योंकि उनकी बात समझने वाला कोई नहीं होता है।

किसी ने काला जादू करवा दिया होगा

आज भी लोग विज्ञान से ज़्यादा अंध-विश्वास को मानते है।हमारे भारत में बच्चा कुछ भी कह दे कि मम्मा मेरा सिर दर्द कर रहा है, मेरा कुछ करने को नहीं मन कर रहा है और भूख लगी है कुछ भी कह दे इन सब का एक हाई जवाब होता है कि तुम पर किसी ने काला जादू कर दिया है।

तुम ज़्यादा फ़ील कर रही हो

डिप्रेशन को हम तब तक गंभीर नहीं मानते जब तक यह ख़तरनाक रूप नहीं ले लेता है।हम अपने बच्चे को कह देते है ऐसा कुछ नहीं होता तुम बस ज़्यादा मत सोचो। यह फ़ोन मत देखों इसने ही तुम्हारा दिमाग़ ख़राब किया है।ज़्यादा सोचना बंद कर दो अपने आप ठीक हो जाऊँगी।

फ़िज़ूल में इतना सोच रही हो

डिप्रेशन को आज भी हमारे समाज में फ़िज़ूल माना जाता है। हम लोग इस पर इतना ध्यान नहीं देते है। जब बच्चे हमसे बहुत दूर हो जाते है फिर हम इस चीज़ के बारे में सोचते है नहीं तो हम डिप्रेशन को फ़िज़ूल और बेकार मानते है।

नज़रिया बदलने की ज़रूरत

डिप्रेशन के प्रति हमें नज़रिया बदलने की ज़रूरत है। सबसे पहले हमें इस चीज़ को स्वीकार करना होगा कि डिप्रेशन सच में होता है। यह कोई फ़िज़ूल बात नहीं है, या फ़र यह कोई भूत प्रेत का साया नहीं है। अगर आप का बच्चा आपसे इस चीज़ के बारे में बात कर रहा है तो आप उसका साथ दे ना कि मज़ाक़ बनाए।

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