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क्यों केवल महिलाएं ही Marriage में Compromise करें?

ओपिनियन | ब्लॉग: शादीशुदा जीवन में जब भी किसी महिला के साथ दुर्व्यवहार किया जाता है तो उनका जवाब "अब कर भी क्या सकते है?" में आता है क्योंकि उन्हें लगता है कि घर में सुख शांति बनाए रखने के लिए उनका कंप्रोमाइज करना ही केवल एकमात्र मार्ग हैI

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Sukanya Chanda
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Why Should Women Always Compromise In Marriage? (image credit- Dr.Karen Finn)

Why Should Women Always Compromise In Marriage?: लगभग हर घरों में पति-पत्नी के बीच कहां-सुनी होना लाज़मी है लेकिन जब बात औरत के इज्जत पर आए तो क्या वह लाज़मी है? बड़े दुख के साथ कहना पड़ रहा है कि हमारे समाज में ज्यादातर महिलाओं के लिए इज्जत केवल एक शब्द बनकर रह गई है। महिलाओं के लिए घर में सुख शांति ही सबसे अहम बात होती है चाहे उसके लिए उन्हें अपनी खुशियों का गला क्यों ना घोटना पड़ेI पर वह यह बात भूल जाती है कि यदि घर में एक सदस्य भी खुश ना हो तो घर का वातावरण कभी भी शांतिप्रिय नहीं बनताI इसका असर केवल पति-पत्नी के रिश्ते पर  भी नहीं बल्कि उनके संतान के परवरिश में भी पड़ता हैI

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क्यों करती है औरतें समझौता? 

औरतों के लिए शादी में समझौता करने का सिला एक साइकिल की तरह काम करता है जो एक पीढ़ी से दूसरी पीढ़ी तक चलता ही रहता है। हम अपने मां को समझौता करते हुए देखते है और शायद कभी हमारी मां ने भी हमारे नानी को ऐसा करते हुए देखा होगा और सबसे अनुचित बात यह है कि देखने के अलावा हमें समझौता करने के लिए परवरिश भी दी जाती है कि यदि विवाहित जीवन में शांति लानी हो तो यह एक औरत का कर्तव्य है कि उन्हें अपने हालातो के साथ समझौता करना ही पड़ता है। लेकिन जब आप अपनी बेटी को शादी में कंप्रोमाइज़ करना सिखाते हैं तो यह जरूर सोचिएगा की क्या आप कंप्रोमाइज़ करके खुश रही है?

इतने समझौते के बाद भी क्या घर में सुख शांति बनी रहती है?

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आप मुश्किलों के साथ एक बार समझौता कर सकती है, दो बार भी कर सकती है लेकिन इससे मुश्किलें कम नहीं, बढ़ती जाती है। यदि मुश्किलों को कम करना हो तो उसे जड़ से खत्म करना आवश्यक है लेकिन उसके लिए कौन तैयार है? आप कई बार औरतों को यह कहते हुए सुनेंगे कि "अब हम कर भी क्या सकते है?" अपने हालातो को नज़रअंदाज करने का परिणाम न केवल आपके बल्कि आपके बच्चों के मानसिक स्थिति पर भी पड़ सकता है। लगातार चल रहे झगड़ों के कारण आपका मन चिड़चिड़ा हो जाता है और आप खुद को अकेला महसूस करने लगते है इसका असर आपके कामों पर पड़ता है और आपका मेंटल और फिजिकल हेल्थ बिगड़ने लगता है। 

क्यों नहीं लड़ पाती औरतें अपने हक के लिए?

औरतें अपने लिए इसलिए नहीं लड़ पाती क्योंकि वह अपने आप को कमजोर महसूस करती है और वह अपने आप ऐसा महसूस नहीं करती बल्कि उन्हें ऐसा महसूस करवाया जाता है। उन्हें यह सिखाया जाता है कि शादी के बाद उनका ससुराल ही उनका सब कुछ है और उनका अपना परिवार पराया हो जाता है। लेकिन क्या उनके माता-पिता का यह हक नहीं बनता कि वह देखे कि उनकी बेटी सुखी है कि नहींI जब औरत का पति ही उसे आघात दे और उसे समझने वाला वह कोई ना हो तो कैसा ससुरालI जब अपने लिए आवाज उठाने की बात होती है तो वह यही कहती है कि "कौन हमारे लिए लड़ेगा?" आखिरकार, उनका मायका तो उन्हें पराया धन मान चुका है।

यदि आप अपने हक के लिए लड़ती है तो आपको मुश्किलों का सामना अवश्य करना पड़ेगा लेकिन उम्र भर पीड़ा भोगने से अच्छा है कि आप अपनी खुशी और अपने इज्जत के लिए लड़े एवं अपने बच्चों के लिए भी  एक प्रेरणा बने।

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