क्या पीरियड्स के दौरान कॉफी पीने से बढ़ सकती हैं आपकी मुश्किलें? जानिए यहां

क्या पीरियड्स के दौरान कॉफी पीने से बढ़ सकती हैं आपकी मुश्किलें? जानिए यहां क्या पीरियड्स के दौरान कॉफी पीने से बढ़ सकती हैं आपकी मुश्किलें? जानिए यहां

SheThePeople Team

11 Nov 2021


Coffee During Periods: यह कोई सीक्रेट नहीं है कि कॉफी हमारी बॉडी पर कितना इफ़ेक्ट डालती है। लेकिन यह हमारे पीरियड्स के लिए क्या करती है? खैर, पहले तो, कॉफ़ी हमारे पीरियड को छोटा करती है। कॉफ़ी पीने से एक महिला के पीरियड के अनकम्फर्टेबल लक्षण बढ़ सकते हैं। दरअसल कॉफ़ी पीना हाई एस्ट्रोजन लेवल से जुड़ा हुआ है, जिससे ब्रेस्ट्स और एंडोमेट्रियल कैंसर होने का खतरा बढ़ जाता है। अपनी डाइट से कैफीन को खत्म करना या कम करना आपकी हेल्थ के लिए फायदेमंद हो सकता है और आपके पीरियड्स के दौरान होने वाली परेशानी को कम कर सकता है।

Connection Between Coffee And Periods: क्या पीरियड्स में कॉफ़ी नुकसानदायक है?


पीरियड्स से पहले के सिम्पटम्स का बढ़ना

ज़्यादा कॉफ़ी पीने से प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम (पीएमएस) की फ्रीक्वेंसी ज़्यादा होती है। जो महिलाएं बहुत ज़्यादा कॉफ़ी पीती हैं, वे उन महिलाओं की तुलना में ज़्यादा सिम्पटम्स फ़ील करती हैं जो कम कॉफ़ी पीने वाली महिलाएं नहीं करती हैं। पीएमएस डिस्कम्फर्ट में क्रैम्प्स, सिरदर्द, ब्रैस्ट टेंडरनेस, सूजन, मूड स्विंग्स, पीठ दर्द, थकान और चिड़चिड़ापन शामिल हो सकते हैं।

ये सभी लक्षण ज़्यादा कॉफ़ी पीने से ज़्यादा होने की संभावना है। कैफीन एक स्टिम्युलेंट ड्रग है जो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को बढ़ाती है। पीएमएस की थकान को दूर करने की कोशिश में, एनर्जी बढ़ाने के लिए महिलाएं ज़्यादा कॉफ़ी भी पीसकती हैं। फिर कैफीन ज़्यादा होने से स्ट्रेस, चिंता, सोने में परेशानी और थकान बढ़ जाती है।

चिंता का बढ़ना

महिलाओं को खास तौर से पीरियड्स समय कैफीन लेने से बचना चाहिए क्योंकि यह ब्लड वेसल्स को रिस्ट्रिक्ट करता है और तनाव और चिंता को बढ़ाता है। कैफीन कोर्टिसोल, नॉरपेनेफ्रिन और एपिनेफ्रिन को बढ़ाता है, जो स्ट्रेस हार्मोन हैं जो ब्लड प्रेशर और हार्ट रेट को बढ़ाने के लिए ज़िम्मेदार हैं। जब शरीर में इन हार्मोनों का लेवल बढ़ जाता है, तो ब्रेन को ऑक्सीजन की आपूर्ति में कमी के कारण इम्यून सिस्टम सुप्रेस्स हो जाता है। यह ब्लड वेसल्स को रिस्ट्रिक्ट करता है और तनाव का कारण बनता है।

महिलाएं कैफीन के प्रति ज़्यादा सेंसिटिव होती हैं क्योंकि शरीर की डिटॉक्सिफिकेशन प्रोसेस महिलाओं में अधिक समय लेती है। कैफीन को बाहर निकालने में शरीर को लगने वाला समय उन महिलाओं में और भी ज़्यादा बढ़ जाता है जो ओरल कॉन्ट्रसेप्टिव्ज़ ले रही हैं या जो प्रेग्नेंट हैं।

क्रैम्पिंग और ब्रैस्ट टेंडरनेस

क्रैम्प्स सबसे आम लक्षणों में से एक है जो एक महिला अपने पीरियड से पहले, उसके दौरान या बाद में फ़ील करती है। कैफीन अपने डाइयुरेटिक नेचर की वजह से क्रैम्प्स में कॉन्ट्रिब्यूट करता है - यह यूरीन प्रोडक्शन और डिहाइड्रेशन को बढ़ावा देता है। इसके अलावा, कॉफी में ऐसे ऑयल्स भी होते हैं जो आपकी इंटेस्टाइन में जलन पैदा कर सकते हैं और क्रैम्प्स पैदा कर सकते हैं।

फाइब्रोसिस्टिक ब्रेस्ट सिंड्रोम एक ऐसी स्थिति है जिसमें कई महिलाएं पीरियड से पहले या उसके दौरान सफ़र हैं। लिक्विड से भरे ब्रेस्ट्स में नॉन-कैंसरस लम्प ही टेंडरनेस और सेल्लिंग का कारण बन सकते हैं। कैफीन को खाने का काफी असरपड़ता है क्योंकि आपके पीरियड के दौरान आप पहले से ही लिक्विड और सॉल्ट बनाए रखते हैं, इसलिए पीरियड के दौरान ब्रेस्ट्स के लम्पस के अंदर लिक्विड बढ़ जाता है और ब्रेस्ट्स की टेंडरनेस को बढ़ा सकता है।

पीरियड्स का इर्रेगुलर होना

जो महिलाएं ज़्यादा कॉफ़ी पीती हैं, उनके पीरियड कम होने की संभावना ज़्यादा होती है क्योंकि कैफीन ब्लड वेसल्स को रिस्ट्रिक्ट करता है, यूट्रस के ब्लड सर्कुलेशन को कम करता है। इसलिए यह पीरियड के दौरान ब्लड फ्लो में कमी करता है और पीरियड छोटा भी कर देता है , जिसकी वजह से एक महिला के पीरियड इर्रेगुलर हो जाते हैं।





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