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Photograph: Via (ETV Bharat)
हरियाणा का घनी खेड़ा बना प्रेरणा: दीवारों पर दिख रहा महिलाओं की शिक्षा का सम्मान
कैसे शुरू हुई यह पहल
गांव में यह पहल सामुदायिक जागरूकता और स्थानीय नेतृत्व के प्रयासों से शुरू हुई। उद्देश्य था कि महिलाओं को परिवार की पहचान में बराबरी का स्थान मिले और उनकी शिक्षा व उपलब्धियों को सार्वजनिक रूप से सम्मानित किया जाए।
घर के मुख्य द्वार या दीवार पर महिला का नाम और उसकी डिग्री लिखना एक simple idea लग सकता है, लेकिन इसका प्रभाव गहरा है। इससे यह संदेश जाता है कि परिवार की पहचान केवल पुरुषों तक सीमित नहीं है।
महिलाओं के लिए पहचान और सम्मान
घनी खेड़ा की कई महिलाओं ने बताया कि पहली बार उन्हें लगा कि उनकी पढ़ाई और मेहनत को खुलकर सराहा जा रहा है। पहले जहां महिलाओं की पहचान अक्सर रिश्तों—जैसे किसी की पत्नी या बेटी—तक सीमित रहती थी, वहीं अब उनके नाम और achievements सामने आ रहे हैं।
यह बदलाव महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ-साथ समाज में उनकी भूमिका को भी मजबूत कर रहा है।
शिक्षा को मिल रहा नया महत्व
इस पहल का एक बड़ा असर लड़कियों की शिक्षा पर भी देखने को मिल रहा है। जब छोटे बच्चे अपने घरों और पड़ोस में महिलाओं की डिग्रियां लिखी हुई देखते हैं, तो उनके मन में पढ़ाई को लेकर प्रेरणा पैदा होती है।
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह Government Initiatives गांव में एक positive competition भी पैदा कर रहा है, जहां परिवार अपनी बेटियों की पढ़ाई पर अधिक ध्यान दे रहे हैं।
समाज की सोच में बदलाव
गांव के बुजुर्गों और पुरुषों ने भी इस बदलाव को Positive बताया है। उनके अनुसार महिलाओं की शिक्षा और पहचान को सम्मान देने से परिवार और समाज दोनों मजबूत होते हैं।
यह पहल यह भी दिखाती है कि परंपराओं को बनाए रखते हुए भी समाज में समानता और सम्मान की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।
चुनौतियाँ और आगे का रास्ता
हालांकि बदलाव की यह शुरुआत प्रेरणादायक है, लेकिन अभी भी Awarenessऔर निरंतर प्रयास की जरूरत है। कुछ परिवारों में झिझक और पुरानी सोच के कारण इस पहल को अपनाने में समय लग रहा है।
फिर भी, घनी खेड़ा का उदाहरण यह साबित करता है कि छोटे-छोटे कदम भी बड़े सामाजिक परिवर्तन का आधार बन सकते हैं।
दूसरे गांवों के लिए प्रेरणा
घनी खेड़ा की यह पहल आसपास के गांवों के लिए भी प्रेरणा बन रही है। कई स्थानों पर लोग इस मॉडल को अपनाने और महिलाओं की शिक्षा व पहचान को सार्वजनिक रूप से सम्मान देने पर विचार कर रहे हैं।
यदि यह पहल व्यापक स्तर पर फैलती है, तो यह ग्रामीण भारत में gender equality को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
घनी खेड़ा गांव की यह पहल केवल नाम लिखने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिलाओं की पहचान, शिक्षा और सम्मान को स्वीकार करने का एक powerful symbol है।
यह कहानी बताती है कि जब समाज महिलाओं की उपलब्धियों को खुलकर मान्यता देता है, तो बदलाव सिर्फ दीवारों पर नहीं, बल्कि सोच और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य में भी दिखाई देता है।
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