Independent Women: रिश्तों में बराबरी का पार्टनर ढूंढना क्यों आज भी है मुश्किल?

आज रिश्तों की डेफिनिशन धीरे-धीरे बदल रही है। इक्वलिटी का रिश्ता वही है जहां दोनों लोग एक-दूसरे की आइडेन्टटी, ड्रीम्स और बौंडरीएस का सम्मान करें।

author-image
Dimpy Bhatt
New Update
independent women struggle to find equal partners

Photograph: (freepik)

आज की महिलाएं पहले से ज्यादा सेल्फ रेलिअन्त(self-reliant), एडुकेटेड(educated) और अपने फैसले खुद लेने वाली हैं। वे करियर, फाइनेंसियल इंडिपेंडेंस और पर्सनल आइडेंटिटी के साथ लाइफ जी रही हैं। लेकिन इसके बावजूद कई इंडिपेंडेंट महिलाओं को रिश्तों में ऐसा पार्टनर ढूंढने में प्रॉब्लम होती है जो उन्हें बराबरी से समझे और एक्सेप्ट करे। इसकी वजह सिर्फ पर्सनल प्रैफरेंसेज नहीं, बल्कि सोइटल सोच और रिश्तों की बदलती एक्सपेक्टेशन भी हैं।

Advertisment

Independent Women: रिश्तों में बराबरी का पार्टनर ढूंढना क्यों आज भी है मुश्किल?

1. ट्रेडिशनल थिंकिण अभी भी मौजूद

सोसाइटी में लंबे टाइम तक ये बिलीफ रहा है कि पुरुष परिवार का मुख्य कमाने वाला होगा और महिला घर की जिम्मेदारी संभालेगी। जब कोई महिला फाइनेंसियल स्ट्रांग और इंडिपेंडेंट होती है, तो ये ट्रेडिशनल थिंकिंग से कनफ्लिक्ट पैदा कर सकता है। कई बार पुरुष या परिवार इस बदलाव को ईज़ली एक्सेप्ट नहीं कर पाते, जिससे रिश्तों में डिस्कम्फर्ट आ सकती है।

2. इक्वलिटी को कम्पटीशन समझ लेना

बराबरी का रिश्ता कोऑपरेशन पर बेस्ड होता है, लेकिन कई बार इसे कम्पटीशन की तरह देखा जाता है। अगर महिला अपने करियर में सक्सेस है या फैसलों में कॉन्फिडेंस दिखाती है, तो कुछ लोग इसे चैलेंज की तरह महसूस कर सकते हैं। इससे रिश्ते में बैलेंस बनाना मुश्किल हो सकता है।

Advertisment

3. बढ़ती उम्मीदें और प्रियोरिटीज 

इंडिपेंडेंट महिलाएं अक्सर रिश्तों में इमोशनल अंडरस्टैंडिंग(emotional understanding), रेस्पेक्ट और सपोर्ट की उम्मीद रखती हैं। वे केवल ट्रेडिशनल रोल तक सीमित नहीं रहना चाहतीं। लेकिन हर व्यक्ति इन एक्सपेक्टेशन के साथ कम्फर्टेबले नहीं होता। इसी वजह से सही पार्टनर चुनने में लम्बा टाइम और कॉम्प्लिकेटेड हो सकती है।

4. बिजी लाइव और लिमिटेड टाइम 

करियर, पर्सनल गोल्स और सेल्फ डेवेलोपमेंट(self-development) पर ध्यान देने के कारण कई महिलाओं के पास रिश्तों को टाइम देने के लिए लिमिटेड टाइम होता हैं। ऐसे में सही व्यक्ति से मिलना और एक मजबूत रिश्ता बनाना चल्लेंजिंग हो सकता है। बिजी लाइफस्टाइल भी इस प्रोसेस को प्रभावित करती है।

5. सोशल टैग और प्रेशर 

कई बार इंडिपेंडेंट महिलाओं को “बहुत अम्बिशयस” या “बहुत इंडिपेंडेंट” जैसे टैग दिए जाते हैं। ये सोशल परसेप्शन रिश्तों को प्रभावित कर सकती है। जबकि सच ये है कि इंडिपेंडेंस का मतलब रिश्तों से दूरी नहीं, बल्कि रेस्पेक्ट और इक्वलिटी के साथ साझेदारी चाहना है। आज रिश्तों की डेफिनिशन धीरे-धीरे बदल रही है। इक्वलिटी का रिश्ता वही है जहां दोनों लोग एक-दूसरे की आइडेन्टटी, ड्रीम्स और बौंडरीएस का सम्मान करें।

Advertisment
Independent Women पार्टनर