क्या हसल कल्चर PMS को और बिगाड़ रहा है? स्ट्रेस और लाइफस्टाइल का कनेक्शन समझें

कई महिलाएँ महसूस करती हैं कि पीरियड्स से पहले उनके सिम्पटम्स पहले से ज़्यादा इंटेंस हो गए हैं, और इसके पीछे हसल कल्चर की बड़ी भूमिका हो सकती है।

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Dimpy Bhatt
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Understand how hustle culture making PMS worse

Photograph: (freepik)

आज की तेज़ रफ्तार लाइफ में “हसल कल्चर” को सक्सेस की पहचान बना दिया गया है। वरवर्क, कम नींद और हर टाइम प्रोडक्टिव रहने का प्रेशर, ये सब आज नॉर्मल मान लिया गया है। लेकिन इस लाइफस्टाइल का असर महिलाओं के बॉडी पर, खासकर PMS यानी प्रीमेंस्ट्रुअल सिंड्रोम पर, पड़ रहा है। कई महिलाएँ महसूस करती हैं कि पीरियड्स से पहले उनके सिम्पटम्स पहले से ज़्यादा इंटेंस हो गए हैं, और इसके पीछे हसल कल्चर की बड़ी भूमिका हो सकती है।

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क्या हसल कल्चर PMS को और बिगाड़ रहा है? स्ट्रेस और लाइफस्टाइल का कनेक्शन समझें

स्ट्रेस हार्मोन्स और PMS का सीधा कनेक्शन

हसल कल्चर की सबसे बड़ी पहचान है, लगातार स्ट्रेस। डेडलाइंस, मल्टीटास्किंग और “ब्रेक न लेने” की आदत से बॉडी में कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है। जब कोर्टिसोल लगातार हाई रहता है, तो यह एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे रिप्रोडक्टिव हार्मोन्स के बैलेंस को बिगाड़ देता है। रिजल्ट, ज़्यादा क्रैम्प्स, मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और थकान जैसे PMS के सिम्पटम्स और तेज़ हो जाते हैं।

नींद की कमी और बिगड़ता हार्मोनल बैलेंस

हसल कल्चर में नींद अक्सर सबसे पहले सैक्रिफाइस होती है। देर रात तक काम करना या स्क्रीन टाइम बढ़ना मेलाटोनिन हार्मोन को प्रभावित करता है, जो नींद और हार्मोनल रेगुलेशन में इम्पोर्टेन्ट रोल निभाता है। जब नींद पूरी नहीं होती, तो बॉडी को रिकवर होने का मौका नहीं मिलता और PMS के दौरान पैन और इमोशनल इम्बैलेंस बढ़ सकता है।

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डाइट और कैफीन पर बढ़ती निर्भरता

लगातार काम के प्रेशर में महिलाएँ हेल्दी फ़ूड की बजाय क्विक ऑप्शन्स चुनने लगती हैं। ज़्यादा कैफीन, शुगर और प्रोसेस्ड फूड बॉडी में इंफ्लेमेशन बढ़ाते हैं, जो पीरियड क्रैम्प्स और ब्लोटिंग को और खराब कर सकते हैं। हसल कल्चर में “कॉफी से दिन चलाना” आम है, लेकिन यही आदत PMS को ट्रिगर कर सकती है।

बॉडी सिग्नल्स को इग्नोर करने की आदत

हसल कल्चर महिलाओं को यह सिखाता है कि पैन और थकान को इग्नोर कर आगे बढ़ते रहो। लेकिन PMS के दौरान बॉडी जो सिग्नल्स देती है, उन्हें इग्नोर करना आगे चलकर बड़ी परेशानी बन सकता है। बार-बार बॉडी की ज़रूरतों को दबाने से हार्मोनल इम्बैलेंस और खराब हो सकता है।

क्या बदलने की ज़रूरत है

PMS कोई वीकनेस नहीं, बल्कि बॉडी का मैसेज है कि उसे केयर चाहिए। हसल कल्चर से बाहर निकलकर ब्रेक लेना, नींद को प्रिऑरिटीज़ करना और स्ट्रेस मैनेज करना PMS को काफी हद तक मैनेज करने में मदद कर सकता है। PMS और लाइफस्टाइल का कनेक्शन समझकर महिलाएँ खुद के लिए ज़्यादा हेल्दी चॉइसेज़ कर सकती हैं—बिना गिल्ट के।

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PMS लाइफस्टाइल