घर के काम में बराबरी: क्या न्यू जनरेशन ला रही है असली बदलाव?

कई बार महिलाएं जॉब करने के बाद भी घर के ज्यादातर काम संभालती हैं। इसका मतलब है कि बदलाव शुरू तो हुआ है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

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Dimpy Bhatt
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new generation changing housework equality

Photograph: (freepik)

घर के काम को लंबे टाइम तक महिलाओं की जिम्मेदारी माना जाता रहा है। लेकिन बदलते टाइम के साथ ये सोच धीरे-धीरे बदलती नजर आ रही है। खासकर न्यू जनरेशन के बीच घर के कामों में बराबरी की बात ज्यादा खुलकर हो रही है। सवाल ये है कि क्या सच में न्यू जनरेशन इस सोच को बदल रही है, या ये बदलाव अभी भी सीमित है?

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घर के काम में बराबरी: क्या न्यू जनरेशन ला रही है असली बदलाव?

1. बदलती सोच की शुरुआत

नई जनरेशन के कई युवा अब ये मानने लगे हैं कि घर चलाना सिर्फ एक व्यक्ति की जिम्मेदारी नहीं हो सकता। कुकिंग, क्लीनिंग या बच्चों की देखभाल — ये सभी काम दोनों पार्टनर्स की जिम्मेदारियां हैं। सोशल मीडिया और अवेयरनेस ने भी इस सोच को आगे बढ़ाने में अहम रोल निभाया है।

2. करियर और लाइफस्टाइल का अस

आज ज्यादातर फैमिलीज़ में दोनों पार्टनर काम करते हैं। ऐसे में घर के कामों का पूरा बर्डन एक व्यक्ति पर डालना प्रैक्टिकल नहीं लगता। न्यू जनरेशन के कई कपल्स अब घर के कामों को आपस में बांटने की कोशिश करते हैं, ताकि दोनों के लिए बैलेंस बनाए रखना आसान हो सके।

3. कम्युनिकेशन और अंडरस्टैंडिंग का महत्व

पहले अक्सर घर के कामों को लेकर खुलकर बातचीत नहीं होती थी। लेकिन आज कई रिश्तों में ये कॉमन टॉपिक का हिस्सा बन गया है। पार्टनर्स आपस में बात करके तय करते हैं कि कौन क्या करेगा, जिससे जिम्मेदारियां क्लियर हो जाती हैं और गलतफहमियां कम होती हैं।

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4. बदलाव अभी भी अधूरा है

हालांकि सोच बदल रही है, लेकिन हर जगह ये बदलाव इक्वल नहीं दिखता। कई फैमिलीज़ में आज भी ट्रेडिशनल उम्मीदें बनी हुई हैं। कई बार महिलाएं जॉब करने के बाद भी घर के ज्यादातर काम संभालती हैं। इसका मतलब है कि बदलाव शुरू तो हुआ है, लेकिन अभी लंबा रास्ता तय करना बाकी है।

5. बराबरी का असली मतलब

घर के कामों में बराबरी का मतलब केवल काम बांटना नहीं, बल्कि एक-दूसरे के एफर्ट को समझना और सम्मान देना भी है। जब दोनों लोग जिम्मेदारियों को शेयर करते हैं, तो रिश्ता ज्यादा बैलेंस और सुप्पोर्टीवे बनता है। न्यू जनरेशन के बीच घर के कामों को लेकर सोच में बदलाव जरूर दिख रहा है असली बदलाव तब होगा जब घर के काम को “मदद” नहीं, बल्कि शेयर रिस्पांसिबिलिटी के रूप में देखा जाएगा।

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