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Embrace Change: छोटी ब्लाउज ठीक, लेकिन क्रॉप टॉप गलत क्यों?

कपड़े सिर्फ शरीर ढकने के लिए ही नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की पहचान और व्यक्तित्व को भी दर्शाते हैं। समय के साथ-साथ फैशन और पहनावे में बदलाव आते रहे हैं। लेकिन, हमारे समाज में अक्सर एक ही तरह के कपड़ों पर दोहरे मापदंड अपनाए जाते हैं।

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Dibya Debasmita Pradhan
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Bouse is ok but not crop top

Image Credit: Pinterest

Why Short Blouses Are Fine but Crop Tops Are Controversial?: कपड़े सिर्फ शरीर ढकने के लिए ही नहीं, बल्कि एक व्यक्ति की पहचान और व्यक्तित्व को भी दर्शाते हैं। समय के साथ-साथ फैशन और पहनावे में बदलाव आते रहे हैं। लेकिन, हमारे समाज में अक्सर एक ही तरह के कपड़ों पर दोहरे मापदंड अपनाए जाते हैं। ऐसी ही एक दिलचस्प बात है - छोटी ब्लाउज ठीक मानी जाती है, लेकिन क्रॉप टॉप को गलत समझा जाता है।

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Embrace Change: छोटी ब्लाउज ठीक, लेकिन क्रॉप टॉप गलत क्यों?

हमारे समाज में साड़ी एक बहुत ही पारंपरिक और सम्मानित पहनावा माना जाता है। साड़ी के साथ छोटी ब्लाउज पहनना एक आम चलन है और इसे पूरी तरह से स्वीकार किया जाता है। ये एक ऐसा परिधान है जो सदियों से भारतीय महिलाओं द्वारा पहना जाता रहा है। इसे पहनने पर किसी को भी कोई आपत्ति नहीं होती, बल्कि इसे आदर की दृष्टि से देखा जाता है।

वहीं दूसरी ओर, जब हम क्रॉप टॉप की बात करते हैं, जो कि पश्चिमी फैशन का हिस्सा है, तो इसे कई लोग नकारात्मक दृष्टिकोण से देखते हैं। क्रॉप टॉप एक ऐसा परिधान है जो नाभि के ऊपर तक होता है और युवतियों द्वारा इसे पहनना अक्सर विवाद का विषय बन जाता है।

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समाज की दोहरी मानसिकता

यह दोहरा मापदंड समझ से परे है। साड़ी के साथ छोटी ब्लाउज पहनना भी तो शरीर का कुछ हिस्सा दिखाने जैसा है, फिर क्रॉप टॉप में आपत्ति क्यों? यह सवाल उठता है कि क्या हमारा समाज सिर्फ इसलिए क्रॉप टॉप को नकारात्मक मानता है क्योंकि यह पश्चिमी पहनावा है? यह समाज की सोच को बदलने की आवश्यकता है, जहां कपड़ों का चुनाव व्यक्तिगत पसंद पर निर्भर होना चाहिए, न कि सामाजिक दबाव पर।

समस्या आपकी सोच में हैं

न्यासा देवगन, काजोल और अजय देवगन की बेटी को 2019 में मंदिर में क्रॉप टॉप पहनने पर बहुत ट्रोल किया गया। लेकिन अगर उन्होंने साड़ी पहनी होती, तो उनकी खूब तारीफ की जाती। हर जगह उनकी वाहवाही होती और सोशल मीडिया में वे ट्रेंड करतीं। यह साफ दर्शाता है कि समस्या कपड़ों में नहीं, बल्कि समाज की सोच में है।

समय के साथ, हमें अपनी सोच को बदलने की आवश्यकता है। कपड़े पहनने का चुनाव व्यक्तिगत होना चाहिए और किसी भी पहनावे को गलत मानना उचित नहीं है। चाहे वह छोटी ब्लाउज हो या क्रॉप टॉप, हर व्यक्ति को अपनी पसंद के अनुसार कपड़े पहनने की स्वतंत्रता होनी चाहिए। समाज की यह दोहरी मानसिकता बदलने के लिए हमें कदम उठाने होंगे, ताकि सभी पहनावे को समान रूप से स्वीकार किया जा सके।

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