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हेल्दी Marriage के लिए कम्यूनिकेशन तकनीकों को जानें

इससे गलतफहमियों और दूरियों को कम किया जा सकता है और आप दोनों मिलकर किसी भी समस्या का सामना कर सकते हैं। संवाद के माध्यम से आप एक-दूसरे की भावनात्मक रूप से नज़दीक आते हैं और आपका वैवाहिक जीवन प्रेम और सम्मान से भरपूर बनता है।

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Anusha Ghosh
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(Credit : One Education )

Marriage: प्रभावी संवाद एक स्वस्थ और खुशहाल विवाहित जीवन की धुरी है। यह न सिर्फ आपकी भावनाओं और जरूरतों को एक-दूसरे तक पहुंचाने में मदद करता है बल्कि आपसी समझ और विश्वास को भी मजबूत करता है। इससे गलतफहमियों और दूरियों को कम किया जा सकता है और आप दोनों मिलकर किसी भी समस्या का सामना कर सकते हैं। संवाद के माध्यम से आप एक-दूसरे की भावनात्मक रूप से नज़दीक आते हैं और आपका वैवाहिक जीवन प्रेम और सम्मान से भरपूर बनता है।

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वैवाहिक जीवन में सुखद संवाद के लिए 5 महत्वपूर्ण तकनीकें

1. एक्टिव लिसनिंग

सक्रिय सुनने का मतलब है कि आप अपने साथी की बातों को पूरा ध्यान से सुनें। सिर्फ शब्दों को सुनना ही काफी नहीं है, बल्कि उनके भावों को भी समझने की कोशिश करें। बीच-बीच में सिर हिलाना, आँखों का संपर्क बनाना और उनकी बातों को दोहराना इस बात का संकेत देता है कि आप ध्यान लगाकर सुन रहे हैं। इससे आपके साथी को यह महसूस होगा कि आप उनकी बातों को गंभीरता से ले रहे हैं और आप उनकी परवाह करते हैं।

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2. "मैं" कथनों का प्रयोग

अपनी बात कहने के लिए "मैं" कथनों का प्रयोग करें। उदाहरण के लिए, "जब तुम देर से घर आते हो तो मुझे गुस्सा आता है" की जगह पर कहें "मुझे ऐसा लगता है कि जब तुम देर से आते हो तो मैं अकेलापन महसूस करती हूँ।" "मैं" कथन से आप अपने साथी पर आरोप लगाने से बचते हैं और अपनी भावनाओं को स्पष्ट रूप से व्यक्त कर सकते हैं। इससे बातचीत को रचनात्मक दिशा मिलती है और समस्याओं को सुलझाने में आसानी होती है।

3. अशाब्दिक संचार पर ध्यान दें

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बातचीत सिर्फ शब्दों से ही नहीं होती। चेहरे के भाव, हाव-भाव और शरीर की भाषा भी बहुत कुछ कहती है। अपने साथी की अशाब्दिक संकेतों पर ध्यान दें। उनकी रुखाई, टूटी निगाहें या बेचैनी इस बात का संकेत हो सकती है कि वे असहज महसूस कर रहे हैं। उसी तरह, आप अपने हाव-भाव पर भी ध्यान दें। क्रोध में मुँह फुलाना या आँखें तरेरना गलत संकेत दे सकता है।

4. सहानुभूति रखें

अपने साथी के नजरिए से चीजों को देखने की कोशिश करें। यह समझने की कोशिश करें कि वे कैसा महसूस कर रहे हैं और ऐसा क्यों महसूस कर रहे हैं। उनकी भावनाओं को कमज़ोर या गलत ना समझें। सहानुभूति रखने से आप उनकी बातों को बेहतर तरीके से समझ पाएंगे और उनके लिए सम्मान का भाव बना रहेगा।

5. समय-समय पर बातचीत करें

एक दूसरे के लिए  समय निकालना बहुत ज़रूरी है। रोज़मर्रा की ज़िन्दगी में व्यस्त होने के कारण हम अक्सर अपने साथी से खुलकर बात नहीं कर पाते। इसलिए हफ्ते में एक बार या किसी खास दिन को एक दूसरे के लिए समय निकालें और खुलकर बातचीत करें। यह न सिर्फ आप दोनों के बीच के रिश्ते को मजबूत करेगा बल्कि किसी भी समस्या को शुरुआत में ही सुलझाने में भी मदद करेगा।

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