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Teens And Parents के बीच जरूरी है इन टॉपिक्स पर कन्वर्सेशन

बच्चों के लाइफ में टीनएज यूनिक और रोमांचक एक्सपीरियंस होता है। बच्चों के साथ खुली बातचीत करना और उन्हें गाइड करना बेहद जरूरी होता है। चलिए, हम उन जरूरी टॉपिक्स को जानें जिनपर पेरेंट्स और बच्चों के बीच बातचीत होनी चाहिए।

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Niharikaa Sharma
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topics must discuss between parents and teens

Image Credit- Freepik

Conversation On These Topics Is Important Between Teens And Parents: बच्चों के लाइफ में टीनएज यूनिक और रोमांचक एक्सपीरियंस होता है। यह उन्हें रोलरकोस्टर की तरह निरंतर ऊपर-नीचे ले जाता है, जिसमें हर समय कुछ न कुछ नया होता है। इसमें हार्मोनल, मेंटल और इमोशनल बदलाव होते हैं, जिनसे निपटना उनके पेरेंट्स और उनके बच्चों के लिए चैलेंजिंग हो सकता है। लेकिन माता-पिता को अपने बच्चों को समझने और सहायता करने के लिए तैयार रहना चाहिए। बच्चों के साथ खुली बातचीत करना और उन्हें गाइड करना बेहद जरूरी होता है। चलिए, हम उन जरूरी टॉपिक्स को जानें जिनपर पेरेंट्स और बच्चों के बीच बातचीत होनी चाहिए।

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टींस और पेरेंट्स के बीच जरूरी है इन टॉपिक्स पर कन्वर्सेशन

सोशल मीडिया सेफ्टी (Social Media Safety)

पिछले कुछ सालों में सोशल मीडिया और मोबाइल का उपयोग बहुत तेजी से बढ़ रहा है, जिससे हमारे बच्चे भी दूर नहीं रह सकते हैं। विशेष रूप से टींस का सोशल मीडिया क्रेज देखकर हैरानी होती है। आजकल, हर बच्चा 24 घंटे मोबाइल और सोशल मीडिया पर बिताता है। इस प्रकार, माता-पिता के लिए जरूरी है कि वे सोशल मीडिया के लाभ और हानियों के बारे में बातचीत करें। साथ ही, उन्हें ऑनलाइन सुरक्षा के बारे में जागरूक करें।

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फाइनेंस (Finance)

आज के समय में लगभग सभी युवाओं को पॉकेट मनी मिलती है। अगर बच्चे की सभी जरूरतों को पेरेंट्स द्वारा ही पूरा किया जाता है, फिर भी बच्चों को पैसों के महत्व को समझाने और अपनी छोटी-मोटी जरूरतों को पूरा करने के लिए पॉकेट मनी की जरुरत होती है। पॉकेट मनी का उपयोग कैसे किया जाए या ज्यादा पॉकेट मनी प्राप्त करने के लिए खुद को इंडिपेंडेंट बनाने के लिए, पेरेंट्स और बच्चे एक-दूसरे के साथ बात कर सकते हैं। इस माध्यम से, बच्चों को पैसों के महत्व के बारे में जानकारी दी जा सकती है।

मेंटल हैल्थ (Mental Health)

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जवानी के दौर में, बच्चों की मानसिक स्थिति (Mental State) उनके समय की तुलना में जटिल हो सकती है। वे सही और गलत के बीच अंतर को समझने में परेशानी महसूस कर सकते हैं और उनका स्वभाव भी अधिक उत्तेजित हो सकता है। इस संदर्भ में, माता-पिता को अपने बच्चों के मेंटल हैल्थ के बारे में उनसे बात करने की जरूरत होती है। साथ ही, घर में एक ऐसा माहौल बनाया जाना चाहिए जिसमें बच्चे खुलकर अपने माता-पिता से अपनी फीलिंग्स और मूड के बारे में बात कर सकें।

लाइफ की इंपोर्टेंस (Importance Of Life)

अब पिछले कुछ सालों में टीनेजर्स के व्यवहार और जीने के तरीके में काफी बदलाव आया है। ज्यादातर युवा लाइफ को ठीक से नहीं लेते और बिना किसी की परवाह किए हुए मनमर्जी चलाते हैं। इस स्थिति में परिवार के सदस्यों के बीच खुली बातचीत का महत्व है, जिससे उनके सही मार्गदर्शन में मदद मिले। यह न केवल उन्हें सही दिशा में ले जाएगा, बल्कि उन्हें एक अच्छे इंसान बनने में भी सहायता मिलेगी।

घर की जिम्मेदारी (Household Responsibility)

माना कि घर की सभी छोटी-बड़ी जिम्‍मेदारियां पेरेंट्स की होती हैं लेकिन टीनेजर्स को उनकी जिम्‍मेदारियों के प्रति अवेयर कराना भी पेरेंट्स का ही काम होता है। यदि बच्‍चों को समय रहते उनकी जिम्‍मेदारियों का अहसास न कराया जाए तो वह जिंदगीभर दब्‍बू बने रहते हैं और किसी भी जिम्‍मेदारी को उठाने से डरने लगते हैं। पेरेंट्स खासकर मां को बच्‍चों से इस बारे में बात करनी चाहिए और उन्‍हें घर के कामों में इंवॉल्‍व करना चाहिए। ये बच्‍चों के शारीरिक विकास और परफॉर्मेंस स्किल को सुधारने में मदद कर सकता है।

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