BAFTA विजेता फिल्म ‘This Is Endometriosis’ — महिलाओं के दर्द पर एक ज़रूरी जागरूकता

BAFTA विजेता This Is Endometriosis एंडोमेट्रियोसिस से जूझ रही महिलाओं के दर्द, मानसिक प्रभाव और हेल्थ जागरूकता की ज़रूरत को संवेदनशील तरीके से दिखाती है।

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Tamanna Soni
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Photograph: Via ( British Council UK FIlms)

महिलाओं की सेहत से जुड़ी कई समस्याएँ आज भी चुप्पी और गलतफहमियों के बीच दब जाती हैं। उन्हीं में से एक है एंडोमेट्रियोसिस, एक ऐसी स्थिति जो लाखों महिलाओं के रोज़मर्रा के जीवन को प्रभावित करती है, लेकिन इसके बारे में खुलकर बात कम होती है। BAFTA विजेता फिल्म This Is Endometriosis इसी खामोशी को तोड़ने की कोशिश करती है। यह फिल्म सिर्फ एक मेडिकल कंडीशन की जानकारी नहीं देती, बल्कि उन महिलाओं की भावनात्मक, शारीरिक और मानसिक यात्रा को सामने लाती है जो इस दर्द के साथ जी रही हैं।

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BAFTA विजेता फिल्म ‘This Is Endometriosis’ — महिलाओं के दर्द पर एक ज़रूरी जागरूकता

एंडोमेट्रियोसिस क्या है?

एंडोमेट्रियोसिस एक क्रॉनिक स्थिति है जिसमें गर्भाशय की अंदरूनी परत जैसा Tissue शरीर के अन्य हिस्सों में बढ़ने लगता है। इससे तेज़ दर्द, भारी पीरियड्स, थकान और कई मामलों में प्रजनन से जुड़ी समस्याएँ भी हो सकती हैं। सबसे बड़ी चुनौती यह है कि इस बीमारी का सही निदान होने में अक्सर सालों लग जाते हैं, क्योंकि इसके लक्षणों को सामान्य पीरियड दर्द समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है।

फिल्म की खासियत

This Is Endometriosis को BAFTA सम्मान मिलने का कारण सिर्फ इसकी विषयवस्तु नहीं, बल्कि इसकी संवेदनशील प्रस्तुति है। फिल्म में वास्तविक महिलाओं की कहानियाँ, डॉक्टरों की राय और व्यक्तिगत अनुभवों को इस तरह जोड़ा गया है कि दर्शक बीमारी के दर्द को महसूस कर पाते हैं। फिल्म दिखाती है कि यह समस्या सिर्फ शारीरिक नहीं, बल्कि रिश्तों, करियर और मानसिक स्वास्थ्य पर भी गहरा असर डालती है।

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खामोशी से संघर्ष तक की कहानी

फिल्म का सबसे प्रभावशाली पहलू यह है कि इसमें महिलाओं के लंबे संघर्ष को ईमानदारी से दिखाया गया है। कई Women's बताती हैं कि उन्हें सालों तक “यह सामान्य दर्द है” कहकर टाल दिया गया। इस दौरान वे न सिर्फ शारीरिक पीड़ा झेलती हैं, बल्कि खुद पर शक और भावनात्मक थकान का सामना भी करती हैं। फिल्म इस बात पर जोर देती है कि दर्द को सामान्य मान लेना महिलाओं के स्वास्थ्य के लिए खतरनाक हो सकता है।

मानसिक और भावनात्मक प्रभाव

एंडोमेट्रियोसिस का असर केवल शरीर तक सीमित नहीं रहता। लगातार दर्द, थकान और अनिश्चितता महिलाओं में चिंता, अवसाद और अकेलेपन की भावना को बढ़ा सकती है। फिल्म इन भावनाओं को संवेदनशील तरीके से दर्शाती है और यह संदेश देती है कि इस बीमारी से जूझ रही महिलाओं को सहानुभूति और समझ की जरूरत है, न कि चुप रहने की सलाह की।

जागरूकता क्यों ज़रूरी है

फिल्म का सबसे बड़ा उद्देश्य जागरूकता फैलाना है। सही जानकारी और समय पर निदान महिलाओं की जिंदगी को काफी हद तक बेहतर बना सकता है। फिल्म यह भी बताती है कि परिवार, साथी और कार्यस्थल का सहयोग महिलाओं के लिए बेहद अहम होता है। जब समाज इस समस्या को समझता है, तभी महिलाएँ बिना झिझक मदद मांग पाती हैं।

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स्वास्थ्य व्यवस्था और चुनौतियाँ

फिल्म में स्वास्थ्य प्रणाली से जुड़ी चुनौतियों को भी उजागर किया गया है—जैसे सही विशेषज्ञ तक पहुंच, महंगे इलाज और जागरूकता की कमी। यह दर्शाता है कि एंडोमेट्रियोसिस सिर्फ व्यक्तिगत नहीं, बल्कि एक सार्वजनिक स्वास्थ्य मुद्दा भी है जिसे गंभीरता से लेने की जरूरत है।

फिल्म का संदेश

This Is Endometriosis का मूल संदेश स्पष्ट है—महिलाओं का दर्द वास्तविक है और उसे सुनना व समझना जरूरी है। फिल्म महिलाओं को अपनी सेहत के प्रति सजग रहने, सवाल पूछने और जरूरत पड़ने पर दूसरी राय लेने के लिए प्रेरित करती है। साथ ही यह समाज से आग्रह करती है कि महिलाओं की पीड़ा को “ओवररिएक्शन” कहकर खारिज न किया जाए।

BAFTA विजेता यह फिल्म सिर्फ एक Documentary नहीं, बल्कि Awareness और सहानुभूति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह हमें याद दिलाती है कि महिलाओं के स्वास्थ्य पर खुली बातचीत बेहद जरूरी है। एंडोमेट्रियोसिस जैसी स्थितियों को समझना और उनके बारे में बात करना न सिर्फ महिलाओं की जिंदगी बेहतर बना सकता है, बल्कि एक संवेदनशील और जागरूक समाज की ओर भी ले जाता है।

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