ब्रेस्ट सेल्फ-चेक: हर महिला के लिए जरूरी आदत, बनाएं हेल्थ रूटीन का हिस्सा

अगर ब्रेस्ट में न्यू लम्प महसूस हो, स्किन में स्ट्रेचिंग या रेडनेस दिखे, निप्पल से उनुसुअल डिस्चार्ज हो या अचानक शेप में चेंज आए, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें।

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Dimpy Bhatt
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breast self check essential habit for every woman

Photograph: (file)

ब्रेस्ट सेल्फ-चेक एक सिंपल लेकिन बहुत इम्पोर्टेन्ट हैबिट है, जो हर महिला को अपनी हेल्थ रूटीन का हिस्सा बनानी चाहिए। रेगुलर सेल्फ एग्जामिनेशन(self-examination) करने से किसी भी एब्नार्मल चेंज को टाइम रहते पहचाना जा सकता है। अवेयरनेस और सही जानकारी से ब्रेस्ट हेल्थ को बेहतर तरीके से प्रोटेक्ट रखा जा सकता है।

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ब्रेस्ट सेल्फ-चेक: हर महिला के लिए जरूरी आदत, बनाएं हेल्थ रूटीन का हिस्सा

1. ब्रेस्ट सेल्फ-चेक क्यों है जरूरी?

ब्रेस्ट में होने वाले चंगे हमेशा पैन के साथ नहीं आते। कई बार स्माल लुम्प्स या स्किन चेंज बिना किसी तकलीफ के भी हो सकते हैं। रेगुलर सेल्फ-चेक से आप अपने बॉडी को बेहतर समझ पाती हैं और किसी भी एब्नार्मल चेंज को जल्दी पहचान सकती हैं। अर्ली डिटेक्शन होने पर ट्रीटमेंट के ऑप्शन भी ज्यादा प्रभावी होते हैं।

2. कब और कितनी बार करें जांच?

मंथ में एक बार ब्रेस्ट सेल्फ-चेक करना सुफ्फिसिएंट(sufficient) माना जाता है। पीरियड्स खत्म होने के 5–7 दिन बाद का टाइम सबसे अच्छा होता है, क्योंकि उस टाइम ब्रेस्ट कम सेंसिटिव होते हैं। जो महिलाएं मेनोपॉज़ के बाद हैं, वो हर मंथ एक फिक्स्ड डेट चुन सकती हैं, ताकि रेगुलरिटी बनी रहे।

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3. सही तरीका क्या है?

सबसे पहले मिरर के सामने खड़े होकर ब्रेस्ट के शेप, स्किन और निप्पल में किसी बदलाव को देखें। फिर लेटते या खड़े होकर, अपनी फिंगरटिप्स से हल्का प्रेशर डालकर सर्कुलर मोशन में पूरे ब्रेस्ट और अंडरआर्म एरिया को एक्सामिने करें। ध्यान रखें कि किसी भी हार्ड लम्प, स्वेलिंग, स्किन में डिम्प या उनुसुअल डिस्चार्ज को इग्नोर न करें।

4. किन सिग्न पर तुरंत डॉक्टर से मिलें?

अगर ब्रेस्ट में न्यू लम्प महसूस हो, स्किन में स्ट्रेचिंग या रेडनेस दिखे, निप्पल से उनुसुअल डिस्चार्ज हो या अचानक शेप में चेंज आए, तो तुरंत डॉक्टर से कंसल्ट करें। हर चेंज कैंसर का सिग्न नहीं होता, लेकिन टेस्ट करवाना हमेशा सेफ स्टेप है।

5. सेल्फ-चेक के साथ रेगुलर स्क्रीनिंग भी जरूरी

ब्रेस्ट सेल्फ-चेक अवेयरनेस बढ़ाने का तरीका है, लेकिन यह मेडिकल स्क्रीनिंग का ऑप्शन नहीं है। ऐज और रिस्क के अकॉर्डिंग मैमोग्राफी(mammography) या डॉक्टर की एक्समैनशन भी जरूरी हो सकती है। फॅमिली में किसी को ब्रेस्ट कैंसर हुआ है तो और ज्यादा सतर्क रहना चाहिए। ब्रेस्ट सेल्फ-चेक कोई डिफिकल्ट प्रोसेस नहीं है, बस कुछ मिनट की अवेयरनेस है।

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ब्रेस्ट कैंसर हेल्थ