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पीरियड्स के दौरान लोअर एब्डोमिनल पैन, बैक पैन और थकान कई महिलाओं के लिए आम बात है। कुछ महिलाओं को ये पैन हल्का होता है, जबकि कुछ के लिए क्रैम्प्स इतने ज़्यादा होते हैं कि डेली टास्क भी मुश्किल लगने लगते हैं। अक्सर इस पैन को हार्मोनल चेंज या लाइफस्टाइल से जोड़कर देखा जाता है, लेकिन अब यह सवाल भी उठने लगा है कि क्या विटामिन D की कमी से पीरियड क्रैम्प्स और ज़्यादा खराब हो सकते हैं?
क्या विटामिन D की कमी से पीरियड क्रैम्प्स और खराब हो सकते हैं?
1. विटामिन D और मसल्स का कनेक्शन
विटामिन D सिर्फ़ बोनस के लिए ही नहीं, बल्कि मसल्स के सही काम करने के लिए भी ज़रूरी होता है। जब बॉडी में इसकी कमी होती है, तो मसल्स ज़्यादा आसानी से सिकुड़ जाती हैं। पीरियड्स के दौरान यूटरिन की मसल्स पहले से ही सिकुड़ती हैं, ताकि ब्लड बाहर निकल सके। ऐसे में विटामिन D की कमी होने पर यह सिकुड़न और पैन बढ़ सकता है, जिससे क्रैम्प्स ज़्यादा महसूस होते हैं।
2. इन्फ्लेम्शन और पैन
विटामिन D बॉडी में इन्फ्लेम्शन को कंट्रोल करने में हेल्प करता है। इसकी कमी होने पर बॉडी में इंफ्लेमेशन बढ़ सकता है। पीरियड्स के दौरान पहले से ही बॉडी में इन्फ्लेम्शन और हार्मोनल चेंज होते हैं। ऐसे में विटामिन D की कमी पैन को और तेज़ बना सकती है, जिससे एब्डोमिनल पैन, बैक पैन और भारीपन ज़्यादा महसूस होता है।
3. हार्मोनल बैलेंस पर असर
पीरियड क्रैम्प्स का सीधा संबंध प्रोस्टाग्लैंडिन के हार्मोन से होता है, जो पैन और सिकुड़न को बढ़ाता है। कुछ रिसर्च यह बताती है कि विटामिन D प्रोस्टाग्लैंडिन के लेवल को बैलेंस करने में मदद कर सकता है। जब बॉडी में विटामिन D कम होता है, तो यह बैलेंस बिगड़ सकता है और दर्द ज़्यादा तेज़ हो सकता है।
4. मूड और थकान का भी होता है असर
विटामिन D की कमी सिर्फ़ फिजिकल पैन तक सीमित नहीं रहती, बल्कि यह मूड स्विंग्स, चिड़चिड़ापन और थकान को भी बढ़ा सकती है। पीरियड्स के दौरान जब बॉडी पहले से ही कमज़ोर महसूस करती है, तब यह कमी मेन्टल रूप से भी असर डालती है। इससे पैन को सहन करना और मुश्किल हो जाता है।
5. क्या करें और कब ध्यान दें
अगर हर महीने पीरियड्स के दौरान बहुत ज़्यादा क्रैम्प्स होते हैं, तो सिर्फ़ पेनकिलर लेने के बजाए अपने विटामिन D लेवल चेक करवाना फायदेमंद हो सकता है। धूप में टाइम बिताना, डाइट में विटामिन D से भरपूर चीज़ें शामिल करना और डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट लेना मददगार हो सकता है। पीरियड्स पैन को “नॉर्मल” मानकर नज़रअंदाज़ करने के बजाय, इसके पीछे की वजहों को समझना और सही देखभाल करना ज़रूरी है।
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