Marital Rape: क्या आप जानते हैं मैरिटल रेप के बारे में यह चीजें

Marital Rape का मतलब है कि अगर किसी पत्नी को पति द्वारा उसकी consent के बिना उसके साथ सेक्सुअल रिलेशन बनाने के लिए मजबूर किया गया है Marital Rape के बारे में इस ब्लॉग के जरिए-

Aastha Dhillon
16 Dec 2022
Marital Rape: क्या आप जानते हैं मैरिटल रेप के बारे में यह चीजें

Marital Rape

Marital Rape: मैरिटल रेप का मतलब है कि अगर किसी पत्नी को पति द्वारा उसकी consent के बिना उसके साथ सेक्सुअल रिलेशन बनाने के लिए मजबूर किया गया है और वह इस स्थिति में है कि इसके खिलाफ बोल भी नहीं सकती है। एक रेपिस्ट हमेशा रेपिस्ट ही रहता है चाहे उस पीड़ित महिला के साथ कोई भी संबंध हो। आइए खुलकर जानते हैं Marital Rape के बारे में इस ब्लॉग के जरिए-

अगर पति ने अपनी पत्नी के साथ रेप किया है, तो वह  वह भी अन्य सभी क्रिमिनलस की तरह ही सजा का पात्र है। वर्तमान में केवल 150 देशों ने Marital Rape का criminalisation किया है और बड़े दुख की बात है कि भारत इन 150 देशों के समूह में शामिल नहीं है।क्योंकि हमारे देश ने अभी तक Marital Rape को criminalised नहीं बनाया है। 

भारतीय कानून प्रणाली और Marital Rape

कोई भी कानून तभी मान्य होता है जब वह संवैधानिकता की कसौटी पर खरा उतरता है। भारतीय कानून में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जो Marital Rape के criminalisation की बात करता हो। भारत के सुप्रीम कोर्ट के साथ-साथ हाई कोर्ट्स में वर्तमान समय में Marital Rape के criminalisation की मांग करने वाली और IPC की धारा 375 में उल्लिखित अपवाद 2 की संवैधानिकता को चुनौती देने वाली रिट याचिकाओं की भरमार है।

आखिर क्या कहती है IPC की धारा 375?

भारत में अगर किसी बाहरी व्यक्ति द्वारा महिला के साथ रेप किया जाता है तो इसे IPC की धारा 375 के तहत एक दंडनीय अपराध माना जाता है लेकिन अगर वह बाहरी व्यक्ति महिला का पति है लड़की की उम्र 15 साल से ऊपर है और उसने विवाहित होते हुए भी उसके इजाजत के बिना उसके साथ संबंध बनाने की कोशिश की है या दबाव डाला है तो हमारे देश के कानून के अनुसार यह अपराध नहीं है। 

लेकिन अभी तक महिलाएं सिर्फ यह शोषण सहती आई हैं। किसी को बताने पर उन्हें खुद यह कहते हुए गलत ठहरा दिया जाता है की आखिर वह उसका पति है और यह करना उसका अधिकार है। आज की 21वीं शताब्दी में भी हमारा समाज ऐसे विचारों के साथ विकास की बात करता है जहां महिलाओं को अपनी इच्छा के अनुसार "ना" तक कहने की इजाजत नहीं है। शायद हमेशा की तरह ही, उसे रेपिस्ट नहीं कहा जाएगा और न ही उसे सजा मिलेगी क्योंकि वह पति है और ऊपर से वे शादीशुदा हैं। 

माना कि हजारों वर्षों से विवाह को एक पवित्र सामाजिक संस्था के रूप में जाना जाता है जो एक पुरुष और महिला को जीवन भर के लिए बांधे रखता है लेकिन वह पवित्र बंधन यह इजाजत तो नहीं देता की पत्नी को ना‌ कहने का भी ‌हक ना हो।  समय आ गया है कि अब Marital Rape को criminalised किया जाए।

 

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