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Photograph: (freepik)
मेनोपॉज़ के दौरान महिलाओं को कई फिजिकल चेंज से गुजरना पड़ता है, जिनमें से नाइट स्वेट्स सबसे परेशान करने वाली प्रॉब्लम है। कई बार नींद के बीच बॉडी इतना गर्म महसूस होता है कि स्वेट से कपड़े और बिस्तर तक भीग जाते हैं। ये प्रॉब्लम न सिर्फ़ नींद को खराब करती है, बल्कि अगले दिन थकान, चिड़चिड़ापन और लो एनर्जी का कारण भी बनती है। सही टाइम और कुछ आसान बदलावों से इस प्रॉब्लम को काफी हद तक मैनेज किया जा सकता है।
मेनोपॉज़ के दौरान रात में आने वाले पसीने से कैसे करें डील?
1. हार्मोनल चेंज को समझना ज़रूरी है
मेनोपॉज़ के दौरान बॉडी में एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल कम होने लगता है। यही चेंज बॉडी के टेम्परेचर कंट्रोल सिस्टम को एफेक्ट करता है। दिमाग को अचानक यह सिग्नल मिलता है कि बॉडी बहुत गर्म है, जबकि असल में ऐसा नहीं होता। इसी वजह से रात में अचानक पसीना आने लगता है। जब महिलाएँ ये रीज़न को समझती हैं, तो वे बेवजह की एंग्जायटी और डर से बचती हैं।
2. कम्फर्टेबले और कूल एनवायरनमेंट रखें
नाईट स्वेट को मैनेज करने के लिए बेडरूम का एनवायरनमेंट बहुत मायने रखता है। रूम में ज़्यादा गर्मी न हो, हल्की हवा आती रहे और बहुत मोटे ब्लैंकेट का यूज़ न किया जाए। कॉटन के कपड़े पहनना और हल्के बेडशीट का यूज़ करना भी हेल्पफुल होता है। ये छोटे चेंज नींद को बेहतर कर सकते हैं।
3. खाने-पीने पर ध्यान दें
रात में सोने से पहले बहुत स्पाइसी खाना, कैफीन या ज़्यादा मीठा खाने से नाइट स्वेट्स बढ़ सकते हैं। लेट नाईट हैवी खाना बॉडी का टेम्परेचर और बढ़ा देता है। हल्का और टाइम पर डिनर करना, साथ ही दिनभर पानी पीते रहना इस प्रॉब्लम को कम करने में मदद करता है।
4. स्ट्रेस और टेंशन को नज़रअंदाज़ न करें
मेंटल स्ट्रेस भी नाइट स्वेट्स को बढ़ा सकता है। मेनोपॉज़ के दौरान मूड स्विंग्स और एंग्जायटी आम बात है, लेकिन अगर मंद लगातार स्ट्रेस में रहेगा, तो बॉडी भी उसका असर दिखाएगा। सोने से पहले रिलैक्स करने की कोशिश करें—हल्की स्ट्रेचिंग, डीप ब्रीथिंग या शांत माहौल में कुछ टाइम बिताना नींद को बेहतर बनाता है।
5. कब डॉक्टर से बात करना ज़रूरी है
अगर नाईट स्वेट बहुत ज़्यदा हो रहा है की उससे नींद पर असर हो रहा है, तो डॉक्टर से सलाह लेना ज़रूरी है। समय पर गाइडेंस लेने से बॉडी में हो रहे चेंज को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है और आगे की प्रोब्लेम्स से बचा जा सकता है। मेनोपॉज़ के दौरान नाईट स्वेट एक आम लेकिन थकाने वाली प्रॉब्लम है। सही इनफार्मेशन, थोड़ी अंडरस्टैंडिंग और सेल्फ केयर से इस फेज को ज्यादा कम्फर्टेबले बनाया जा सकता है।
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