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आजकल PCOD कई महिलाओं की ज़िंदगी का हिस्सा बन चुका है। यह सिर्फ़ एक मेडिकल कंडीशन नहीं है, बल्कि यह लाइफस्टाइल, मेंटल हेल्थ और रोज़मर्रा के बिहेवियर से भी गहराई से जुड़ी हुई है। महिलाएं अक्सर दवाओं पर निर्भर रहती हैं, लेकिन कुछ ज़रूरी चेंज के बिना PCOD को मैनेज करना मुश्किल हो जाता है। अगर इन चेंज पर शुरुआत में ही ध्यान दिया जाए, तो PCOD के सिम्पटम्स का ट्रीटमेंट किया जा सकता है।
PCOD को कंट्रोल करना है? तो ज़िंदगी में इन चेंज को न करें इग्नोर
1. लाइफस्टाइल
PCOD में सबसे पहला असर लाइफस्टाइल पर पड़ता है। देर तक जागना, इर्रेगुलर शेड्यूल और लगातार बैठे रहना, ये सभी हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित कर सकते हैं। जब बॉडी में सही आराम और रूटीन की कमी होती है, तो पीरियड्स इर्रेगुलर हो जाते हैं और थकान बढ़ जाती है। इसलिए, डेली रूटीन में थोड़ी सिम्पलिसिटी और कंसिस्टेंसी ज़रूरी है।
2. हेल्दी डाइट
PCOD अक्सर वेट गेन से जोड़ दिया जाता है, लेकिन असल में हेल्दी डाइट हार्मोन को रेगुलेट करने में हेल्प कर सकती है। ज़्यादा प्रोसेस्ड फ़ूड, स्वीट्स और जंक फ़ूड बॉडी में इंसुलिन लेवल बिगड़ सकता है। फाइबर और प्रोटीन से भरपूर होम कुक्ड फ़ूड बॉडी को अंदर से स्ट्रांग बनाता है और सिम्पटम्स को कंट्रोल करने में मदद करता है।
3. स्ट्रेस को इग्नोर न करे
PCOD और स्ट्रेस का आपस में गहरा रिश्ता है। लगातार स्ट्रेस में रहने से हार्मोन और ज़्यादा बिगड़ जाते हैं। कई महिलाएं काम, परिवार और सोसाइटी की उम्मीदों में खुद की ज़िम्मेदारियों को खो देती हैं। अगर माइंड शांत नहीं है, तो बॉडी ठीक से वर्क नहीं करेगी। इसलिए, PCOD मैनेजमेंट के लिए स्ट्रेस कम करना एक ज़रूरी हिस्सा है।
4. एक्सरसाइज़ करे
PCOD में ज़्यादा एक्सरसाइज़ ज़रूरी नहीं है, लेकिन अपने बॉडी को एक्टिव रखना ज़रूरी है। हल्की वॉक, योग और स्ट्रेचिंग, ये सभी ब्लड सर्कुलेशन और हार्मोन लेवल को बढ़ाने में मदद कर सकते हैं। लगातार बैठे रहने की आदत PCOD के सिम्पटम्स को बढ़ा सकती है, इसलिए डेली मूवमेंट ज़रूर करें।
5. अपनी बॉडी की सुनना सीखें
PCOD वाली महिलाएं अक्सर अपनी प्रोब्लेम्स को इग्नोर कर देती हैं। इर्रेगुलर पीरियड्स, पैन या थकान को “नॉर्मल” मान लेना सही नहीं है। अपने बॉडी के सिग्नल को समझना और जितनी जल्दी हो सके मेडिकल हेल्प लेना बहुत ज़रूरी है। PCOD को कंट्रोल करना एक दिन का काम नहीं है, लेकिन सिंपल चेंज लंबे समय में बड़ा असर डाल सकते हैं। अपनी हेल्थ को प्रायोरिटी देना इस जर्नी को शुरू करने का सबसे असरदार तरीका है।
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