मेनोपॉज़ के दौरान वर्किंग वीमेन को सबसे ज़्यादा क्या स्ट्रगल करना पड़ता है?

मेनोपॉज़ में नींद न आना या बार-बार नींद टूटना आम प्रॉब्लम है। जब रात भर नींद पूरी नहीं होती, तो अगला दिन ऑफिस में और ज़्यादा भारी लगने लगता है।

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Dimpy Bhatt
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What working women struggle with the most during menopause

Photograph: (Canva)

मेनोपॉज़ महिलाओं की ज़िंदगी का वह दौर है, जहाँ बॉडी और माइंड दोनों में बड़े चेंज आते हैं। लेकिन जब यही बदलाव वर्किंग वीमेन के लाइफ में आते हैं, तो यह जर्नी और भी चल्लेंजिंग हो जाता है। ऑफिस की रेस्पॉन्सिबिलिटीज़ , घर का प्रेशर और बॉडी में हो रहे चेंज —इन सबके बीच बैलेंस बनाना आसान नहीं होता। कई बार महिलाएँ खुद भी समझ नहीं पातीं कि वे किस स्ट्रगल से गुजर रही हैं, क्योंकि इस पर खुलकर बात कम होती है।

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मेनोपॉज़ के दौरान वर्किंग वीमेन को सबसे ज़्यादा क्या स्ट्रगल करना पड़ता है?

1. लगातार थकान और एनर्जी की कमी

मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोनल चेंज की वजह से महिलाओं को बिना ज़्यादा काम किए भी थकान महसूस होती है। वर्किंग वीमेन के लिए यह सबसे बड़ी प्रॉब्लम बन जाती है, क्योंकि ऑफिस में फोकस और एक्टिव रहना ज़रूरी होता है। मीटिंग्स, डेडलाइंस और लॉन्ग वर्किंग टाइम बॉडी पर और ज़्यादा असर डालता है, जिससे महिलाएँ खुद को हमेशा एक्सहॉस्टेड महसूस करने लगती हैं।

2. मूड स्विंग्स और इमोशनल स्ट्रेस

इस दौरान मूड स्विंग बहुत आम होते है। कभी चिड़चिड़ापन, कभी उदासी और कभी एंग्जायटी —ये सब वर्कप्लेस पर मुश्किल पैदा कर सकते हैं। कई महिलाएँ डरती हैं कि अगर उन्होंने अपनी इमोशनल कंडीशन दिखाई, तो उन्हें अनप्रोफेशनल समझा जाएगा। इसलिए वे सब कुछ अंदर ही दबाए रखती हैं, जिससे मेन्टल स्ट्रेस और बढ़ जाता है।

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3. नींद की समस्या और उसका असर काम पर

मेनोपॉज़ में नींद न आना या बार-बार नींद टूटना आम प्रॉब्लम है। जब रात भर नींद पूरी नहीं होती, तो अगला दिन ऑफिस में और ज़्यादा भारी लगने लगता है। कंसन्ट्रेशन कम हो जाता है, छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आने लगता है और काम की स्पीड पर भी असर पड़ता है।

4. वर्कप्लेस पर समझ की कमी

आज भी कई वर्कप्लेस पर मेनोपॉज़ को लेकर न तो बात होती है और न ही समझा जाता है। महिलाएँ अपनी प्रॉब्लम खुलकर बताने से हिचकिचाती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि लोग इसे ऐज या वीकनेस से जोड़ देंगे। यह चुप्पी उनकी प्रोब्लेम्स को और बढ़ा देती है और वे अकेले ही सब संभालने की कोशिश करती हैं।

5. खुद को साबित करने का दबाव

मेनोपॉज़ के दौरान भी वर्किंग वीमेन पर यह प्रेशर बना रहता है कि वे पहले की तरह ही परफॉर्म करें। वे खुद को कमजोर दिखाना नहीं चाहतीं और हर हाल में सब कुछ मैनेज करने की कोशिश करती हैं। यही दबाव उन्हें फिजिकली और मेंटली रूप से और थका देता है। मेनोपॉज़ के दौरान वर्किंग वीमेन का स्ट्रगल सिर्फ़ पर्सनल नहीं, प्रोफेशनल भी होता है। अगर इस फेज को समझा जाए, खुलकर बात की जाए और सपोर्ट मिले, तो महिलाएँ इस फेज़ को भी कॉन्फिडेंस के साथ संभाल सकती हैं।

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मेनोपॉज मूड स्विंग्स