मेनोपॉज़ पर खुली बातचीत की नई शुरुआत: बेंगलुरु के Fabulous Over Forty ने बदली मिडलाइफ की सोच

Fabulous Over Forty Bengaluru में महिलाओं और विशेषज्ञों ने menopause पर खुलकर बातचीत की। इस आयोजन ने स्वास्थ्य, भावनात्मक बदलाव और मिडलाइफ को आत्मविश्वास के साथ अपनाने का मजबूत संदेश दिया।

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Tamanna Soni
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Photograph: (Fabulous Over Forty festival | Image: SheThePeople)

मेनोपॉज़ को अक्सर जीवन के एक शांत और निजी दौर के रूप में देखा जाता है, जिस पर खुलकर बातचीत कम ही होती है। कई महिलाएँ इस चरण से गुजरते समय शारीरिक और भावनात्मक बदलावों को अकेले झेलती हैं। इसी चुप्पी को तोड़ने का काम किया बेंगलुरु में आयोजित Fabulous Over Forty Bengaluru ने, जहाँ मेनोपॉज़ को समस्या नहीं बल्कि जीवन के एक नए और सशक्त अध्याय के रूप में प्रस्तुत किया गया।

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मेनोपॉज पर खुली बातचीत की नई शुरुआत: बेंगलुरु के Fabulous Over Forty ने बदली मिडलाइफ की सोच

SheThePeople और Gytree के इस आयोजन में सैकड़ों महिलाएँ, स्वास्थ्य विशेषज्ञ और विचारशील वक्ता एक मंच पर आए। यहाँ हार्मोन, मानसिक स्वास्थ्य, रिश्ते, करियर और आत्मस्वीकृति जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत हुई।

क्यों जरूरी है मेनोपॉज़ पर संवाद

समाज में आज भी मेनोपॉज़ को लेकर झिझक और गलतफहमियाँ मौजूद हैं। कई महिलाएँ अपने अनुभव साझा करने में असहज महसूस करती हैं, जिससे सही जानकारी और सहारा नहीं मिल पाता।

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कार्यक्रम की शुरुआत में Shaili Chopra ने कहा कि मिडलाइफ में महिलाओं के स्वास्थ्य पर खुली चर्चा बहुत कम होती है। Fabulous Over Forty का उद्देश्य महिलाओं को ऐसा मंच देना है जहाँ वे अपने सवाल पूछ सकें, अनुभव साझा कर सकें और खुद को समझा हुआ महसूस करें।

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Photograph: (OBGYN Dr Sudeshna Ray in conversation with Shaili Chopra, Founder of SheThePeople & Gytree | Image: SheThePeople)

विशेषज्ञों से मिली सरल और भरोसेमंद जानकारी

इवेंट में मेनोपॉज़ और पेरिमेनोपॉज़ के वैज्ञानिक पहलुओं को आसान भाषा में समझाया गया। स्त्री रोग विशेषज्ञ Dr Sudeshna Ray ने इंटरव्यू आधारित सत्र में हार्मोनल बदलाव, पोषण, उपचार और अंतरंग स्वास्थ्य से जुड़े कई सवालों के जवाब दिए। उन्होंने बताया कि सही मार्गदर्शन से इस दौर को सहज बनाया जा सकता है।

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इसके बाद Dr Harshitha Jain ने हार्मोन थेरेपी को लेकर जानकारी साझा की और बताया कि हर महिला के लिए उपचार अलग होता है, इसलिए व्यक्तिगत देखभाल जरूरी है।

चिकित्सक Dr Sunayana U Kumar ने भी बातचीत के दौरान इस बात पर जोर दिया कि सोशल मीडिया पर मिलने वाली अधूरी जानकारी के बजाय विशेषज्ञ सलाह लेना अधिक सुरक्षित है।

शरीर के बदलाव और पेल्विक हेल्थ पर चर्चा

पेल्विक हेल्थ विशेषज्ञ Dr Anuja Chandrana ने अपने सत्र में बताया कि हार्मोनल उतार-चढ़ाव, नींद की कमी और तनाव शरीर के कई हिस्सों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने महिलाओं को पेल्विक हेल्थ से जुड़ी समस्याओं के प्रति जागरूक रहने और समय पर मदद लेने की सलाह दी।

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इस चर्चा ने महिलाओं को यह भरोसा दिया कि शरीर में हो रहे बदलाव सामान्य हैं और सही जानकारी से उन्हें बेहतर तरीके से संभाला जा सकता है।

हंसी और अनुभवों के बीच भावनात्मक जुड़ाव

कार्यक्रम का एक खास और हल्का पल वह रहा जब स्टैंडअप कलाकार Amruta Bendre ने मिडलाइफ की चुनौतियों को हास्य के माध्यम से साझा किया। उन्होंने अपने अनुभवों में करियर बदलाव, परिवार की जिम्मेदारियाँ और मूड स्विंग्स जैसे विषयों को शामिल किया, जिससे माहौल सहज और जुड़ाव भरा बन गया।

उनकी बातों ने यह संदेश दिया कि 40 के बाद जीवन में स्पष्टता बढ़ती है और महिलाएँ खुद को लेकर अधिक सहज और आत्मविश्वासी बनती हैं।

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Photograph: (Standup comedian Amruta Bendre at the Fabulous Over Forty festival | Image: SheThePeople)

मानसिक मजबूती और संतुलित जीवनशैली पर जोर

एक अन्य चर्चा में Neeraja Ganesh, Dr Yatri Thacker और Sumaya Anwaar ने मिडलाइफ में मानसिक मजबूती और समग्र स्वास्थ्य पर विचार साझा किए।

सुमाया ने कहा कि मेनोपॉज़ पर परिवार और पार्टनर के साथ खुलकर बातचीत करना जरूरी है, ताकि महिलाओं को सही समर्थन मिल सके। वहीं डॉ यात्री ने तनाव और भावनात्मक बदलावों के प्रभाव को समझाते हुए संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को महत्वपूर्ण बताया।

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नीरजा गणेश ने अपने अनुभव साझा करते हुए महिलाओं को तुलना से बचने और अपनी व्यक्तिगत यात्रा को स्वीकार करने की सलाह दी।

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Photograph: (Dr Yatri Thacker, holistic homeopathy physician (L) and Sumaya Anwaar , Founder of MenoCare (R) at the Fabulous Over Forty festival | Image: SheThePeople)

खामोशी से संवाद तक की यात्रा

Fabulous Over Forty Bengaluru केवल एक कार्यक्रम नहीं, बल्कि जागरूकता और समर्थन का सशक्त प्रयास बनकर सामने आया। यहाँ महिलाओं को न केवल विशेषज्ञों से जानकारी मिली, बल्कि एक ऐसा समुदाय भी मिला जहाँ वे अपने अनुभव साझा कर सकीं और खुद को अकेला महसूस नहीं किया।

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इस आयोजन ने यह स्पष्ट किया कि जब महिलाओं को सही जानकारी, समझ और सहयोग मिलता है, तो मेनोपॉज़ डर या असहजता का विषय नहीं रह जाता। इसके बजाय यह आत्मखोज, मजबूती और नई शुरुआत का समय बन सकता है।

मिडलाइफ की यह नई कहानी बताती है कि 40 के बाद जीवन रुकता नहीं, बल्कि अधिक आत्मविश्वास, स्पष्टता और संभावनाओं के साथ आगे बढ़ता है।

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