मेनोपॉज़ में माइग्रेन क्यों बढ़ता है? कारण समझें और कैसे करें मैनेज

मेनोपॉज़ से पहले का टाइम, जिसे पेरिमेनोपॉज़ कहा जाता है, सबसे ज्यादा चल्लेंजिंग होता है। इस फ्रेज हार्मोन लेवल लगातार ऊपर-नीचे होते रहते हैं।

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Dimpy Bhatt
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why menopause triggers migraines and how to control them

Photograph: (freepik)

मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोनल चेंज, खासकर एस्ट्रोजन में ड्राप, माइग्रेन की प्रॉब्लम को बढ़ा सकते हैं। इस टाइम नींद की कमी, स्ट्रेस और उन्स्तब्ले लाइफस्टाइल भी पैन को ट्रिगर करती है। सही जानकारी, रेगुलर रूटीन और प्रॉपर ट्रीटमेंट की मदद से मेनोपॉज़ से जुड़े माइग्रेन को इफेक्टिव तरीके से मैनेज किया जा सकता है।

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मेनोपॉज़ में माइग्रेन क्यों बढ़ता है? कारण समझें और कैसे करें मैनेज

माइग्रेन बढ़ने की सबसे बड़ी वजह

मेनोपॉज़ के दौरान बॉडी में एस्ट्रोजन (Estrogen) का लेवल तेजी से घटता और बदलता है। यही हार्मोन माइग्रेन से गहराई से जुड़ा होता है। जब एस्ट्रोजन अचानक कम होता है, तो ब्रेन की ब्लड वेसल्स पर असर पड़ता है, जिससे हेअदचे की इंटेंसिटी बढ़ सकती है। कई महिलाओं को 30–40 की ऐज से ही पीरियड्स से जुड़ा माइग्रेन शुरू हो जाता है, जो मेनोपॉज़ के टाइम और ज्यादा गंभीर हो सकता है।

पेरिमेनोपॉज़ का उन्स्तब्ले पेरिओस 

मेनोपॉज़ से पहले का टाइम, जिसे पेरिमेनोपॉज़ कहा जाता है, सबसे ज्यादा चल्लेंजिंग होता है। इस फ्रेज हार्मोन लेवल लगातार ऊपर-नीचे होते रहते हैं। ये इंस्ताबिलिटी माइग्रेन ट्रिगर करने का बड़ा कारण बनती है। कई महिलाओं को इस फेज में पहले से ज्यादा बार और ज्यादा तेज दर्द महसूस होता है। अच्छी बात यह है कि पूरी तरह मेनोपॉज़ के बाद कुछ महिलाओं में माइग्रेन कम भी हो सकता है।

नींद की कमी और स्ट्रेस का असर

मेनोपॉज़ के दौरान हॉट फ्लैश, नाईट स्वेट और बेचैनी के कारण नींद प्रभावित होती है। नींद की कमी माइग्रेन का आम ट्रिगर है। इसके अलावा मूड स्विंग, एंग्जायटी और मेन्टल स्ट्रेस भी पैन को बढ़ा सकते हैं। जब बॉडी और मन दोनों थके हुए हों, तो माइग्रेन के अटैक जल्दी और ज्यादा इंटेंस हो सकते हैं।

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लाइफस्टाइल में बदलाव की जरूरत

मेनोपॉज़ के टाइम खान-पान और डेली रूटीन पर ध्यान देना बेहद जरूरी है। ज्यादा कैफीन, प्रोसेस्ड फूड, इर्रेगुलर मील्स और डिहाइड्रेशन माइग्रेन को ट्रिगर कर सकते हैं। रेगुलर एक्सरसाइज, योग और प्राणायाम हार्मोन बैलेंस में मदद कर सकते हैं। हल्की वॉक और डीप ब्रीथिंग तकनीक भी सिरदर्द को कण्ट्रोल कर सकती  हैं।

मैनेजमेंट के असरदार उपाय

माइग्रेन को पूरी तरह खत्म करना पॉसिबल नहीं होता, लेकिन सही मैनेजमेंट से इसे काफी हद तक कण्ट्रोल किया जा सकता है। डॉक्टर से सलाह लेकर हार्मोन थेरेपी या माइग्रेन की दवाएं ली जा सकती हैं। ट्रिगर डायरी बनाना भी फायदेमंद होता है — इससे पता चलता है कि कौन-सी चीजें पैन बढ़ा रही हैं। एनफ पानी पीना, रेगुलर नींद और बैलेंस डाइट सबसे इफेक्टिव हो सकता हैं। मेनोपॉज़ एक नेचुरल प्रोसेस है, लेकिन इससे जुड़े माइग्रेन को इग्नोर नहीं करना चाहिए।

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