पेरिमेनोपॉज़ में क्यों बढ़ता है वज़न? जानिए हार्मोनल बदलाव और कंट्रोल के स्मार्ट तरीके

इस फेज़ में खुद को पहले जैसा बनाने का प्रेशर लेना हार्मफुल हो सकता है। पेरिमेनोपॉज़ एक नेचुरल प्रोसेस है और इसमें बॉडी में चेंज भी नेचुरल है।

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Dimpy Bhatt
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Learn about weight gain during perimenopause and smart ways to control them

Photograph: (freepik)

पेरिमेनोपॉज़ महिलाओं की लाइफ का वो फेज़ है, जहाँ बॉडी धीरे-धीरे मेनोपॉज़ की तरफ बढ़ता है। इस दौरान कई महिलाओं को ये शिकायत होती है कि बिना ज़्यादा खाए या लाइफस्टाइल बदले भी वेट गेन होने लगता है। अक्सर महिलाएँ खुद को इसके लिए ब्लामे करने लगती हैं, जबकि रियलिटी ये है कि पेरिमेनोपॉज़ में वेट गेन ज़्यादातर हार्मोनल चेंज से जुड़ा होता है।

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पेरिमेनोपॉज़ में क्यों बढ़ता है वज़न? जानिए हार्मोनल बदलाव और कंट्रोल के स्मार्ट तरीके

हार्मोनल चेंज कैसे बढ़ाते हैं वेट 

पेरिमेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का लेवल लगातार ऊपर-नीचे होता रहता है। एस्ट्रोजन बॉडी में फैट डिस्ट्रीब्यूशन को कंट्रोल करता है। जब इसका लेवल घटता-बढ़ता है, तो बॉडी फैट को ज़्यादा स्टोर करने लगता है, खासकर पेट और कमर के आसपास। इसके साथ ही मेटाबॉलिज़्म भी धीरे हो जाता है, जिससे पहले जैसा कैलोरी बर्न नहीं हो पाता और वेट गेन होने लगता है।

स्ट्रेस और नींद की कमी भी बनती हैं वजह

इस फेज़ में मूड स्विंग्स, एंग्जायटी और नींद की प्रॉब्लम आम हो जाती है। नींद पूरी न होने से कोर्टिसोल हार्मोन बढ़ता है, जो वेट गेन में इम्पोर्टेन्ट रोले निभाता है। साथ ही स्ट्रेस की वजह कई महिलाएँ इमोशनल ईटिंग करने लगती हैं, जिससे अनजाने में कैलोरी इनटेक बढ़ जाता है।

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मसल मास की कमी और एक्टिविटी में चेंज 

एजिंग  के साथ मसल मास धीरे-धीरे कम होने लगता है। मसल्स कम होने का मतलब है कम कैलोरी बर्न होना। पेरिमेनोपॉज़ में कई महिलाएँ थकान या जॉइंट पैन के कारण पहले जितनी एक्टिव नहीं रह पातीं, जिससे वेट गेन की संभावना और बढ़ जाती है।

वज़न कंट्रोल के स्मार्ट और रियलिस्टिक तरीके

पेरिमेनोपॉज़ में वेट कंट्रोल करना डिफिकल्ट ज़रूर है, लेकिन इम्पॉसिबल नहीं। सबसे ज़रूरी है अपने बॉडी को समझना और उसे सपोर्ट देना। क्रैश डाइट या ज़्यादा स्ट्रिक्ट रूटीन अपनाने से बेहतर है कि बैलेंस्ड डाइट ली जाए, जिसमें प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट शामिल हों। रेगुलर स्ट्रेंथ ट्रेनिंग मसल मास को बनाए रखने में मदद करती है, जबकि वॉकिंग या योग स्ट्रेस कम करने में हेल्प करता है।

सेल्फ किंडनेस और पेशेंस ज़रूरी

इस फेज़ में खुद को पहले जैसा बनाने का प्रेशर लेना हार्मफुल हो सकता है। पेरिमेनोपॉज़ एक नेचुरल प्रोसेस है और इसमें बॉडी में चेंज भी नेचुरल है। पेरिमेनोपॉज़ में बढ़ता वेट बॉडी का फेलियर नहीं, बल्कि हार्मोनल बदलावों का संकेत है।

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पेरिमेनोपॉज़ वेट गेन