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Mother's Day: अब मदर्स को Bare Minimum सहने की कोई जरूरत नहीं

हम लोगों ने मदर्स के प्रति बेयर मिनिमम. व्यव्हार को बिल्कुल सामान्य मान लिया है। हमें लगता है कि उन्हें किसी अप्रिशिएसन की कोई जरूरत नहीं होती है लेकिन हम सब कुछ अपने मन में क्यों सोच लेते हैं? क्या आप ने कभी यह जानने कोशिश की हमारी मदर्स को क्या पसंद है?

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Rajveer Kaur
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(Image Credit: Free

Mother's Day: भारतीय समाज में मां के ऊपर बोझ बहुत ज्यादा है।। अब आप सोचेंगे कि मां के ऊपर ऐसा कौन सा बोझ है? सबसे पहले एक महिला बच्चे को 9 महीने तक अपने पेट में रखती है, वो भी कोई आसान बात है। उसके बाद बच्चा पैदा होता है, फिर उसकी परवरिश और पालन पोषण की जिम्मेदारी भी ज्यादातर उसकी होती है। इस पूरी प्रोसेस में माँ की फिजिकल, मेंटल और इमोशनल हेल्थ प्रभावित होती है। कई बार ऐसे भी दिन होते हैं जहां पर महिला को सोने का समय नहीं मिलता है क्योंकि बच्चे को पालना इतना आसान नहीं है और भारतीय समाज में यह सिर्फ एक औरत की जिम्मेदारी ही है। इसके बदले में उन्हें बिल्कुल भी अच्छा व्यवहार नहीं मिलता है। हमारी मदर्स बेयर मिनिमम में जी रही हैं। चलिए आज इसके उपर बात करते हैं।

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अब मदर्स को Bare Minimum सहने की कोई जरूरत नहीं

हम सब अगर अपनी लाइफ में देखें, कितनी बार हम अपनी मदर्स को स्पेशल करवाते हैं। हमें तो लगता है, यह सब उनकी जिम्मेदारी है। यहाँ पर हम गलती कर देती हैं। हम लोगों ने मदर्स के प्रति बेयर मिनिमम. व्यव्हार को बिल्कुल सामान्य मान लिया है। हमें लगता है कि उन्हें किसी अप्रिशिएसन की कोई जरूरत नहीं होती है लेकिन हम सब कुछ अपने मन में क्यों सोच लेते हैं? क्या आप ने कभी यह जानने कोशिश की हमारी मदर्स को क्या पसंद है? उनकी क्या ख्वाहिश है? उन्हें किस चीज में खुशी मिलती है? क्या होममेकर बनना उनकी पर्सनल चॉइस थी या फिर उन्हें इसे अपनाना पड़ा? हम अपनी मदर्स के साथ कभी उस लेवल पर बात ही नहीं करते हैं। हमें लगता है कि बच्चे पैदा करना ही उनकी लाइफ है, चाहे वो वर्किंग भी हैं लेकिन उनकी असली जिम्मेदारी यही है और इसमें उन्हें कभी कोई प्रॉब्लम नहीं है।

लंबे समय से मदर्स इस बात को एहसास किए बिना कि उनके साथ बेयर मिनिमम व्यवहार हो रहा है, अपनी जिंदगी व्यतीत कर रहीं हैं। हमने कभी नहीं कहा, मां आज तुम बैठो खाना हम बनाते हैं। सारा दिन तुम भागदौड़ करती रहती हो, कभी ब्रेक भी लिया करो। हम सब को हमारी मदर्स तब तक अच्छी लगती हैं,  जब तक वो घर में सब काम कर रही हैं। कई बार तो हम उन्हें यह भी बोल देते हैं कि तुम सारा दिन करती क्या हो।

अगर एक दिन मां बीमार हो जाए तो घर में किसी को कोई चीज नहीं मिलती है क्योंकि सारा घर उस अकेली औरत ने ही संभाल कर रखा है। हम तो इतना भी नहीं एफर्ट करते की कभी उसके लिए भी कुछ स्पेशल कर ले। अब समय आ गया है कि मदर्स को अपनी वैल्यू पहचानने की जरूरत है। आप किसी से भी कम नहीं हैं। आप भी बर्नआउट होती हैं, इसलिए आपको भी ब्रेक चाहिए। इसके लिए किसी को सफाई देने की जरूरत नहीं है। अगर परिवार के लोग आपकी वैल्यू नहीं पहचानते हैं तो आप भी उनकी परवाह करना छोड़ सकती हैं क्योंकि जब तक आप बेयर मिनिमम में सेटल रहेंगी तब तक उन्हें भी आपकी कीमत का अंदाजा नहीं होगा।

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