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Divorced Women: क्यों महिलाओं का तलाकशुदा होना समाज को रास नहीं?

तलाकशुदा होने का टैग जब किसी औरत के साथ लग जाता है तो उस औरत का चरित्र अपने आप ही बुरा हो जाता है। यह हमारे समाज की सच्चाई है। यहां पर आज भी महिलाओं का शादी में घुट-घुट कर जीना, अन्याय सहन करना और चुप रहना अच्छा समझा जाता है

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Rajveer Kaur
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(Image Credit: Bonobology)

Why Society Don't Accept Divorced Women: तलाकशुदा होने का टैग जब किसी औरत के साथ लग जाता है तो उस औरत का चरित्र अपने आप ही बुरा हो जाता है। यह हमारे समाज की सच्चाई है। यहां पर आज भी महिलाओं का शादी में घुट-घुट कर जीना, अन्याय सहन करना और चुप रहना अच्छा समझा जाता है लेकिन उनका तलाकशुदा होना बिल्कुल भी पसंद नहीं है। ऐसी औरतों को समाज स्वीकार नहीं करता है। इन्हें 'घर तोड़ने वाली औरतें' कहा जाता है। आज के समय में हम यह कहते हैं कि सब लोग अवेयर हैं, पढ़े लिखे हैं लेकिन जब तलाक की बात आती है तब पढ़े-लिखे लोग भी औरतों का इसमें साथ नहीं देते हैं। उन्हें भी महिला की तरफ से लिया गया यह स्टेप मंजूर नहीं है तो चलिए आज समाज के इस रूप की बात करते हैं।

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क्यों महिलाओं का तलाकशुदा होना समाज को रास नहीं?

तलाक लेने में कुछ भी बुरा नहीं है। अगर कोई महिला शादी में अनकंफरटेबल महसूस कर रही है, उसे अपनी शादी में आगे भविष्य नहीं नजर आ रहा है, उसे लग रहा है कि अब उसका पार्टनर उसकी तरफ ध्यान नहीं दे रहा है, उनकी वैल्यू नहीं कर रहा है या फिर मारपीट कर रहा है,इमोशनल एब्यूज किया जा रहा है और बात-बात पर झूठ बोलता है तो ऐसी स्थिति में आप पार्टनर के बदलने की वेट नहीं कर सकते। आपको अपने लिए कुछ स्टेप्स लेने ही होंगे। उनमें एक तलाक भी है क्योंकि यह चीजें आपकी मेंटल हेल्थ को बहुत ज्यादा प्रभावित करती हैं। इसके साथ ही आपका समय और एनर्जी भी लेती हैं। यहां पर तलाक लेने का मतलब आप टॉक्सिक मैरिज से निकलकर अपने लिए एक सेफ स्पेस क्रिएट कर रहे हैं। अगर किसी को इसमें भी परेशानी हो रही है या फिर वह उसके लिए भी आपको बुरा कह रहा है तो वह फिर उनकी समस्या है। ज्यादातर ऐसा महिलाओं के साथ होता है क्योंकि यह समाज मर्द प्रधान है।

अगर  महिला किसी पुरुष को छोड़ने का फैसला ले लेती है तो उसे अच्छा नहीं समझा जाता है। ऐसी महिलाओं को कहा जाता है कि इससे अपना घर संभाला नहीं गया। उन्हें ऐसा कहा जाता है कि महिलाएं तो समझौता कर लेती हैं, इतना तो हर किसी महिला को सहन करना ही पड़ता है लेकिन सवाल यह है कि महिलाओं को इतना भी क्यों सहन करना पड़ता है? अगर हम पितृसत्ता सोच का साथ नहीं छोड़ेंगे तो हम हम हमेशा ही महिलाओं को सहन करने देंगे और यही हमें सही लगता है।

तलाकशुदा महिलाओं को समाज में कठिनाइयों का सहन करना पड़ता है। उन्हें इस बात की सफाई देनी पड़ती है कि क्यों उन्होंने लाइफ में इतना बड़ा कदम उठाया हालांकि इससे किसी को कोई मतलब नहीं होना चाहिए। हर कोई सुझाव देने लगता है कि इतना बड़ा फैसला क्यों लिया? अभी तुम्हारी आगे की लाइफ का क्या होगा आपको लगता है कि महिला ने अगर इतना बड़ा फैसला लिया है तो जरूर इससे पहले कुछ अपने लिए सोचा होगा और उसे भी अपने बच्चों की फिक्र है। अगली बार जब आपको कोई तलाकशुदा होने पर जज करें या फिर कुछ कहेंगे तो आपको किसी को सुनने की जरूरत नहीं है। यह आपकी पर्सनल चॉइस है। आपको इन चीजों को किसी को भी समझाने की जरूरत नहीं है। यह आपकी लाइफ है।

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