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Photograph: (File)
सोने से पहले मोबाइल स्क्रॉल करना आजकल लगभग हर किसी की हैबिट बन चुकी है। लेकिन क्या ये हैबिट आपकी आंखों और नींद दोनों को नुकसान पहुंचा रही है? नाइट स्क्रॉलिंग से आंखों में डॉयनेस, इर्रिटेशन और नींद की प्रॉब्लम बढ़ सकती हैं। सही जानकारी और स्माल प्रिकॉशन आपकी ऑय हेल्थ बचा सकती हैं।
नाइट स्क्रॉलिंग का सच—क्या आप अपनी आंखों को नुकसान पहुंचा रहे हैं?
1. ब्लू लाइट(Blue Light) का असर
मोबाइल और लैपटॉप स्क्रीन से निकलने वाली ब्लू लाइट आंखों पर दबाव डालती है। रात के टाइम जब आसपास लाइट कम होती है, तो स्क्रीन की तेज लाइट और ज्यादा चुभती है। इससे आंखों में इर्रिटेशन, सिरदर्द और थकान महसूस हो सकती है। लंबे टाइम तक ये हैबिट डिजिटल आई स्ट्रेन को बढ़ा सकती है।
2. ड्राई आई (Dry Eye) और ब्लर्रेड विज़न
लगातार स्क्रीन देखने से हम ब्लिंक कम करते हैं। इससे आंखों के मॉइस्चर कम हो जाती है और ड्राई आई की प्रॉब्लम हो सकती है। डॉयनेस, इचिंग या ब्लर्रेड विज़न इसके कॉमन सिम्प्टम हैं। अगर ये प्रॉब्लम डेली होने लगे, तो आंखों की हेल्थ पर गंभीर असर पड़ सकता है।
3. नींद की क्वालिटी पर इम्पैक्ट
नाइट स्क्रॉलिंग सिर्फ आंखों को ही नहीं, बल्कि आपके मंद को भी एफेक्ट करता है। ब्लू लाइट मेलाटोनिन हार्मोन के प्रोडक्शन को रिडूस कर सकती है, जो नींद के लिए जरूरी है। इसका रिजल्ट— देर से नींद आना, बार-बार जागना और सुबह थकान महसूस करना। जब नींद पूरी नहीं होती, तो आंखों की थकान और ज्यादा बढ़ती है।
4. फोकस और मानसिक थकान
रात में लगातार सोशल मीडिया या न्यूज स्क्रॉल करना मंद को आराम नहीं करने देता। इससे मेन्टल थकान बढ़ती है और अगले दिन ध्याकंसन्ट्रेट करना मुश्किल हो सकता है। आंखों और दिमाग दोनों को सोने से पहले आराम की जरूरत होती है।
5. कैसे बचाएं अपनी आंखें?
सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन से दूरी बनाएं। मोबाइल में नाइट मोड या ब्लू लाइट फिल्टर का यूज़ करें। 20-20-20 रूल अपनाएं — हर 20 मिनट बाद 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। रूम की लाइट बैलेंस रखें और आंखों को बार-बार ब्लिंक की आदत डालें। नाइट स्क्रॉलिंग एक कॉमन हैबिट है, लेकिन इसे कण्ट्रोल करना जरूरी है।
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