साइलेंट स्ट्रगल: वर्किंग वीमेन को प्रभावित कर रही ये सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम्स

कई महिलाएं इसे नार्मल समझकर इग्नोर कर देती हैं, लेकिन यही स्ट्रेस आगे चलकर एंग्जायटी, हाई ब्लड प्रेशर और माइग्रेन जैसी प्रॉब्लम का कारण बन सकता है।

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Dimpy Bhatt
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serious health issues facing working women today

Photograph: (File)

आज की वर्किंग वीमेन घर और ऑफिस दोनों की रेस्पॉन्सिबिलिटीज़ निभाती हैं, लेकिन इस भागदौड़ में अक्सर अपनी हेल्थ को इग्नोर कर देती हैं। स्ट्रेस, हार्मोनल इम्बैलेंस, बैक पैन और मेन्टल थकान जैसी प्रॉब्लम धीरे-धीरे सीरियस रूप ले सकती हैं। टाइम रहते पहचान और सही देखभाल इन “साइलेंट” हेल्थ इश्यूज़ को कंट्रोल करने में मदद कर सकती है।

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साइलेंट स्ट्रगल: वर्किंग वीमेन को प्रभावित कर रही ये सीरियस हेल्थ प्रॉब्लम्स

क्रॉनिक स्ट्रेस और एंग्जायटी

ऑफिस डेडलाइन, घर की जिम्मेदारियां और सोशल एक्सपेक्टेशन — ये सब मिलकर लगातार स्ट्रेस पैदा कर सकते हैं। लंबे टाइम तक बना रहने वाला स्ट्रेस हार्मोनल बैलेंस बिगाड़ सकता है और नींद, दीजेस्टिव और मूड पर असर डालता है। कई महिलाएं इसे नार्मल समझकर इग्नोर कर देती हैं, लेकिन यही स्ट्रेस आगे चलकर एंग्जायटी, हाई ब्लड प्रेशर और माइग्रेन जैसी प्रॉब्लम का कारण बन सकता है।

हार्मोनल इम्बैलेंस और इर्रेगुलर पीरियड्स

वर्किंग लाइफ की इर्रेगुलर वर्क रूटीन, नींद की कमी और गलत खान-पान हार्मोनल बैलेंस को प्रभावित कर सकते हैं। इसका असर पीरियड्स पर दिखता है — जैसे इर्रेगुलर साइकिल, ज्यादा पैन या एक्सेसिवे ब्लीडिंग। कई केसेस में ये पीसीओएस (PCOS) या थायरॉइड जैसी प्रॉब्लम का संकेत भी हो सकता है। इसलिए बार-बार हो रही गड़बड़ी को हल्के में न लें।

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बैक(Back) और नैक(Neck) पैन

लंबे टाइम तक लैपटॉप पर काम करना, गलत पोस्चर में बैठना और फिजिकल एक्टिविटी की कमी से बैक, नैक और शोल्डर में पैन कॉमन हो गया है। शुरुआत में हल्का पैन इग्नोर किया जाता है, लेकिन टाइम के साथ ये क्रॉनिक पेन में बदल सकता है। करेक्ट सिटींग पोस्चर, बीच-बीच में स्ट्रेचिंग और रेगुलर एक्सरसाइज इस प्रॉब्लम को कम कर सकते हैं।

नींद की कमी और थकान

वर्क-लाइफ बैलेंस की कमी के रीज़न कई महिलाओं की नींद पूरी नहीं हो पाती। लगातार नींद की कमी से इम्यूनिटी वीक हो सकती है, वेट गेन हो सकता है और मेन्टल थकान बढ़ती है। बॉडी को रोज 7–8 घंटे की क्वालिटी नींद की जरूरत होती है। सोने से पहले स्क्रीन टाइम कम करना और रिलैक्सेशन तकनीक अपनाना फायदेमंद हो सकता है।

नुट्रिशन की कमी और एनीमिया(Anemia)

भागदौड़ भरी लाइफ में कई बार महिलाएं अपना खाना स्किप कर देती हैं या नुट्रिशन से भरपूर भोजन नहीं ले पातीं। इससे आयरन(iron), कैल्शियम(calcium) और विटामिन(vitamin) की कमी हो सकती है। खासकर एनीमिया(Anemia) वर्किंग वीमेन में आम है, जो वीकनेस, डिज़्ज़िनेस्स(dizziness) और थकान का कारण बनता है। बैलेंस्ड डाइट और जरूरत पड़ने पर सप्लीमेंट्स लेना जरूरी है। वर्किंग वीमेन की ये हेल्थ प्रॉब्लम्स अक्सर “साइलेंट” रहती हैं, लेकिन इन्हें इग्नोर करना सही नहीं है। खुद की हेल्थ को प्रायोरिटी देना कोई सेल्फिश नहीं, बल्कि एक जरूरी स्टेप है।

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PCOS एंग्जायटी Anemia