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Photograph: (iStock)
कई युगों से पितृसत्ता जैसी विषैली सोच के कारण समाज में महिलाओं का संघर्ष जारी है। महिलाएं चाहे किसी भी क्षेत्र में अपना करियर बनाना चाहें, लेकिन उनके स्नातक का पूरा होते ही उनकी शादी की बात शुरू हो जाती है।
Shaadi as Milestone: क्यों आज भी महिलाओं की Success का Parameter केवल शादी माना जाता है?
शादी और समाज
शादी एक बहुत ही निजी फैसला होता है, लेकिन सामाजिक और घर के दबाव के कारण कई महिलाओं को न चाहते हुए भी शादी करनी पड़ती है। यदि महिलाएं अपनी पढ़ाई पूरी करना चाहें या करियर ग्रोथ पर ध्यान देना चाहें, तो उन्हें अपने जीवन से जुड़े फैसले लेने का अधिकार नहीं दिया जाता, और उनके जीवन की ज़िम्मेदारी किसी और के हाथ में होती है।
करियर का महत्व
वर्तमान में युवा अपने करियर को लेकर काफ़ी सजग और चिंतित हैं, और वे आत्मनिर्भर बनना चाहते हैं। आज के समय में अपने पैरों पर खड़ा होना बेहद ज़रूरी है, लेकिन फिर भी कई परिवारों में लड़कियों को आगे बढ़ने नहीं दिया जाता। विवाह के बाद, यदि उन्हें उत्पीड़न या हिंसा का सामना करना पड़े, तो आत्मनिर्भर न होने के कारण वे अपने न्याय के लिए आवाज़ नहीं उठा पातीं।
मानसिक दबाव
‘सही समय’ पर शादी का दबाव उनकी मानसिक स्थिति पर गंभीर असर डालता है। अनचाही सीमाएँ और समाज में अफ़वाहें उन्हें तनाव में धकेल देती हैं। इसके साथ ही उनके आत्मविश्वास में कमी आ जाती है। शादी को सफलता का पैमाना बनाना उनकी आत्म-स्वीकृति और स्वतंत्रता को सीमित करता है। कई महिलाएँ अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार जीवन जीना चाहती हैं, लेकिन सामाजिक अपेक्षाओं के कारण उन्हें “अधूरी” महसूस करवाया जाता है।
असली माइलस्टोन
किसी भी व्यक्ति के जीवन में उसका असली माइलस्टोन आत्म-संतोष है, यानी वह स्वयं प्रसन्न हो। महिलाओं को केवल शादी के मापदंड से सफल नहीं माना जा सकता। यह क्रूरता है। शादी एक बड़ी और ज़िम्मेदारी भरी भूमिका है, और पितृसत्ता होने के कारण यह महिला के जीवन में बहुत बड़े बदलाव लाती है। जब शादी महिला की हो रही है और जीवन उसे ही जीना है, तो किसी भी रूप में सामाजिक और गृहस्थ दबाव अनुचित और क्रूर है।
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