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Photograph: (freepik)
मेनोपॉज़ को लंबे टाइम से एक ऐसी चीज़ माना जाता रहा है, जो सिर्फ़ महिलाओं से जुड़ी है और जिसे चुपचाप सहन किया जाना चाहिए। घर हो या वर्कप्लेस, इस टॉपिक पर खुलकर बात करना आज भी उनकंफर्टबले माना जाता है। लेकिन सच्चाई यह है कि मेनोपॉज़ सिर्फ़ महिलाओं की बॉडी में होने वाला चेंज नहीं है, बल्कि इसका असर रिश्तों, परिवार और प्रोफेशनल लाइफ पर भी पड़ता है। ऐसे में पुरुषों का इस बातचीत में शामिल होना ज़रूरी हो जाता है।
मेनोपॉज़ सिर्फ़ ‘महिलाओं की प्रॉब्लम’ नहीं: पुरुषों को इस बातचीत में क्यों शामिल होना चाहिए
मेनोपॉज़ का इफ़ेक्ट सिर्फ़ बॉडी तक सीमित नहीं
मेनोपॉज़ के दौरान हार्मोनल चेंज महिलाओं के मूड, नींद, एनर्जी और इमोशन्स पर गहरा असर डालते हैं। कभी चिड़चिड़ापन, कभी थकान और कभी अचानक उदासी—ये चेंज डेली की लाइफ को प्रभावित करते हैं। जब पुरुष इन बदलावों को “ओवररिएक्शन” या “मूड स्विंग्स” कहकर टाल देते हैं, तो महिलाओं को अकेलापन और गलत समझे जाने का एहसास होता है।
रिश्तों में अंडरस्टैंडिंग और सपोर्ट की ज़रूरत
चाहे वह पति हो, पार्टनर हो या परिवार का कोई मेल मेंबर—अगर वे मेनोपॉज़ को समझें, तो रिश्तों में बहुत फर्क आ सकता है। छोटे-छोटे बदलाव, जैसे ज़्यादा पेशेंट रखना, सुनना और इमोशनल सपोर्ट देना, महिलाओं के लिए इस फेज़ को आसान बना सकते हैं। यह समझ रिश्तों में कनफ्लिक्ट को कम करती है।
वर्कप्लेस पर पुरुषों का रोल
वर्कप्लेस पर भी ज़्यादातर डिसीज़न-मेकिंग पोज़िशन पर पुरुष होते हैं। अगर वे मेनोपॉज़ को सिर्फ़ “पर्सनल इश्यू” मानकर इग्नोर करते हैं, तो वर्किंग वीमेन के लिए यह दौर और मुश्किल हो जाता है। फ्लेक्सिबल वर्किंग ऑवर्स, सपोर्टिव पॉलिसीज़ और ओपन बातचीत का माहौल तभी बन सकता है, जब पुरुष इस टॉपिक को समझें और सीरियसली लें।
मेनोपॉज़ पर चुप्पी तोड़ना क्यों ज़रूरी है
जब पुरुष इस बातचीत में शामिल होते हैं, तो मेनोपॉज़ से जुड़ी गलतफहमियाँ टूटती हैं। यह सिर्फ़ महिलाओं की ज़िम्मेदारी नहीं रह जाती कि वे खुद ही सब समझें और संभालें। बातचीत करने से ये एक हेल्थ और लाइफ-स्टेज का इशू बनता है, न कि कोई छुपाने वाली प्रॉब्लम।
बराबरी की सोच की शुरुआत
अगर पुरुष इस बदलाव को समझें और एक्सेप्ट करें, तो यह जेंडर सेंसिटिविटी और इक्वलिटी का एक बड़ा स्टेप हो सकता है। इससे महिलाओं को न सिर्फ़ सपोर्ट मिलता है, बल्कि उन्हें यह एहसास भी होता है कि वे इस सफ़र में अकेली नहीं हैं। मेनोपॉज़ पर बातचीत में पुरुषों की मौजूदगी इसे नॉर्मलाइज़ करने की शुरुआत है। ये अंडरस्टैंडिंग, रेस्पेक्ट और पार्टनरशिप की ओर बढ़ता हुआ स्टेप है—जो हर रिश्ते और सोसाइटी को ज़्यादा हेल्दी बना सकता है।
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