मेनोपॉज़ में शरीर क्यों देने लगता है मिनरल की कमी के संकेत? जानें ज़रूरी वार्निंग

मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी कम हो जाता है। यह हार्मोन सिर्फ़ पीरियड्स से जुड़ा नहीं है, बल्कि बोन, हार्ट और मेटाबॉलिज़्म की सेहत में भी इम्पोर्टेन्ट रोले निभाता है।

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Dimpy Bhatt
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symptoms of mineral deficiency appear in women body during menopause

Photograph: (freepik)

मेनोपॉज़ महिलाओं की लाइफ का एक नेचुरल फेज़ है, लेकिन इसके साथ आने वाले बदलाव कई बार चौंका देते हैं। हॉट फ्लैशेज़, मूड स्विंग्स और नींद की परेशानी के अलावा एक और अहम बदलाव होता है—बॉडी में मिनरल की कमी के संकेत दिखने लगते हैं। अक्सर इन संकेतों को उम्र का असर समझकर इग्नोर कर दिया जाता है, जबकि इनके पीछे गहरा हार्मोनल कनेक्शन होता है।

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मेनोपॉज़ में शरीर क्यों देने लगता है मिनरल की कमी के संकेत? जानें ज़रूरी वार्निंग

एस्ट्रोजन का गिरता लेवल और मिनरल बैलेंस

मेनोपॉज़ के दौरान एस्ट्रोजन हार्मोन का स्तर काफी कम हो जाता है। यह हार्मोन सिर्फ़ पीरियड्स से जुड़ा नहीं है, बल्कि बोन, हार्ट और मेटाबॉलिज़्म (metabolic) की सेहत में भी इम्पोर्टेन्ट रोले निभाता है। जब एस्ट्रोजन कम होता है, तो बॉडी कैल्शियम को सही तरीके से एब्जॉर्ब नहीं कर पाता। इसका असर बोन्स पर पड़ता है और ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) का खतरा बढ़ जाता है। इसी तरह मैग्नीशियम (magnesium) और आयरन जैसे मिनरल्स का बैलेंस भी प्रभावित हो सकता है।

बोन्स और मसल्स में पैन—सिर्फ़ उम्र नहीं

मेनोपॉज़ के बाद कई महिलाएँ जॉइंट पैन, मसल क्रैम्प्स और कमजोरी की शिकायत करती हैं। इसे अक्सर “नॉर्मल एजिंग” मान लिया जाता है, लेकिन यह कैल्शियम और मैग्नीशियम की कमी का संकेत हो सकता है। बार-बार क्रैम्प्स या थकान महसूस होना भी मिनरल इम्बैलेंस की चेतावनी है।

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हार्ट और ब्लड प्रेशर पर असर

मिनरल्स सिर्फ़ बोन्स तक सीमित नहीं हैं। पोटैशियम (Potassium) और मैग्नीशियम (magnesium) हार्टबीट और ब्लड प्रेशर को बैलेंस रखने में मदद करते हैं। मेनोपॉज़ के बाद इनका इम्बैलेंस हाई ब्लड प्रेशर या हार्ट से जुड़ी प्रॉब्लम का जोखिम बढ़ा सकता है। अगर अचानक हार्टबीट तेज़ महसूस हो या चक्कर आएं, तो इसे लाइटली नहीं लेना चाहिए।

स्किन, हेयर और नेल्स भी देते हैं संकेत

ड्राई स्किन, हेयर लोस्स और नाखूनों का कमजोर होना भी मिनरल डेफिशिएंसी (mineral deficiencies) की निशानी हो सकते हैं। आयरन और जिंक की कमी से ये बदलाव और ज्यादा दिखने लगते हैं। कई बार महिलाएँ इसे सिर्फ़ ब्यूटी इश्यू समझती हैं, जबकि यह अंदरूनी कमी का संकेत होता है।

क्या करें आगे?

मेनोपॉज़ के दौरान रेगुलर हेल्थ चेकअप बहुत ज़रूरी हो जाता है। कैल्शियम, विटामिन D, आयरन और मैग्नीशियम के लेवल की जांच करवाना समझदारी है। डाइट में ग्रीन वेजिटेबल, दालें, नट्स, सीड्स और डेयरी प्रोडक्ट्स शामिल करने से काफी मदद मिल सकती है। डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लेना भी फायदेमंद हो सकता है।

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मेनोपॉज़ कोई बीमारी नहीं, लेकिन यह बॉडी का ऐसा स्टेज है जहाँ एक्स्ट्रा केयर की ज़रूरत होती है। मिनरल की कमी के संकेतों को पहचानना और टाइम रहते कदम उठाना महिलाओं को इस फेज़ में मज़बूत और हेल्दी बनाए रख सकता है। अपने बॉडी की छोटी-छोटी वार्निंग को सुनना ही असली समझदारी है।

मेनोपॉज आयरन विटामिन कैल्शियम